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OMG! ये रेत या बजरी नहीं, चूरमा है! JCB से मिलाया जा रहा है घी, चीनी और मेवा
Jaipur News in Hindi

Mahesh Dadhich | News18 Rajasthan
Updated: January 30, 2020, 8:14 PM IST
OMG! ये रेत या बजरी नहीं, चूरमा है! JCB से मिलाया जा रहा है घी, चीनी और मेवा
शुक्रवार से शुरू होगा लक्‍खी मेला.

राजस्थान (Rajasthan) में कोटपुतली मेले की खातिर इन दिनों तैयार किए जा रहे चूरमे के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं तो ट्रक और ट्रैक्टर में लादकर उसे सही जगह पहुंचाया जा रहा है. इस मेले के लिए 240 क्विंटल के चूरमे की प्रसादी बनती है.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में पारंपारिक व्यंजन दाल, बाटी और चूरमा (Churma) तो आपने खूब खाया होगा या फिर देखा तो होगा ही, लेकिन कभी आपने चूरमे का टीला या पहाड़ देखा है. कोटपुतली मेले की खातिर इन दिनों तैयार किए जा रहे चूरमे के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं तो ट्रक और ट्रैक्टर में लादकर चूरमा ले जाया जा रहा है. यही नहीं, चूरमा बनाने के लिए यहां थ्रेसर मशीनों का उपयोग भी किया जा रहा है. मजेदार बात ये है कि जेसीबी से किसी पहाड़ की खुदाई नहीं बल्कि चूरमे में बूरा और मेवा मिलाई जा रही है.

शुक्रवार से शुरू होगा लक्‍खी मेला
कोटपुतली के पौराणिक मान्यता वाले कुहाड़ा के छापाला भैंरूजी मंदिर में कल यानी शुक्रवार को लक्खी मेला शुरू हो रहा है. बीते 11 बरसों से यहां एक महीने पूर्व से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं. जबकि सालाना होने वाले इस उत्सव के लिए हजारों ग्रामीण जुटते हैं और भोजन प्रसादी भी पाते हैं, लेकिन ये सब इतना व्यवस्थित होता है कि हर कोई देखते रह जाता है.

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प्रसादी के लिए होता है जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्‍टर का प्रयोग.


240 क्विंटल के चूरमे की बनती है प्रसादी
राजस्थान का पारंपारिक और स्वादिष्ठ भोजन चूरमा, बाटी और दाल तैयार की जाती है. इस मेले के लिए 240 क्विंटल के चूरमे की प्रसादी बनती है, जिसमें 13 क्विंटल घी, 50 क्विंटल चीनी, 3 क्विंटल काजू और 2 क्विंटल किशमिश मिलाई जाती है. इन्हें मिलाने के लिए जेसीबी की सहायता ली जाती है. जबकि ट्रेक्टरों में भरकर इसे पहुंचाया या स्टोर किया जाता है. चूरमे के बड़े टीले फावड़े की मदद से मिलाए जाते हैं. भोजन के लिए यहां चूरमा ही नहीं बल्कि 80 क्विंटल दही और 25 क्विंटल दाल भी बनाई गई. यह धाम भैंरू बाबा के परम शिष्य सोनगिरा पोसवाल की अटूट आस्था से जुड़ा है. यहां भैंरू बाबा और खेजड़ी वृक्ष की पूजा करने के लिए लोग पहुंचते हैं. यही नहीं, लक्खी मेले शुक्रवार यहां हर दो घंटे में हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी, जो कि खास आकर्षण का केन्द्र होगी.

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First published: January 30, 2020, 8:01 PM IST
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