Rajasthan Political Crisis: 27 साल पहले की वो घटना, जब भैरोंसिंह शेखावत बिन बुलाये पहुंच गये थे राजभवन
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Rajasthan Political Crisis: 27 साल पहले की वो घटना, जब भैरोंसिंह शेखावत बिन बुलाये पहुंच गये थे राजभवन
राजस्थान राजभवन के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब विधायकों ने घरना-प्रदर्शन किया

तब भाजपा (BJP) को चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत (Baliram Bhagat) ने भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिया था, बल्कि कांग्रेस सरकार (Congress Government) बनवाने की सोच रखी थी.

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जयपुर. राजस्थान में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है और कई मर्यादाएं तार-तार हो रहीं हैं. आज से 27 साल पहले वर्ष 1993 में भी कुछ इसी तरह का विवाद उपजा था. तब राज्यपाल बलिराम भगत (Baliram Bhagat) और भैरोंसिंह शेखावत (Bhairon Singh Shekhawat) आमने-सामने थे. उस सियासी घटनाक्रम को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार गोपाल शर्मा का कहना है कि भाजपा (BJP) को चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल बलिराम भगत ने भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिया था. सियासी घमासान को देखते हुए करीब 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे. और राज्यपाल ने बहुमत नहीं होने के बावजूद कांग्रेस (Congress) की सरकार बनवाने की सोची थी. इसके विरोध में भैरोंसिंह शेखावत बिना बुलाए राजभवन पहुंच गए थे और राज्यपाल के सामने अपना विरोध दर्ज करवाया था. स्थितियों को भांपते हुए राज्यपाल बलिराम भगत ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दे दिया था.

एक मिनट के अंदर शेखावत को मिला था सरकार बनाने का न्यौता 

वरिष्ठ पत्रकार गोपाल शर्मा तब पूरे घटनाक्रम के समय राजभवन के अन्दर ही मौजूद थे. गोपाल शर्मा का कहना है कि उस समय राज्यपाल बलिराम भगत और भैरोंसिंह शेखावत के बीच तल्खी जरुर थी, लेकिन धरना या नारेबाजी जैसी स्थिति नहीं बनी थी. भैरोंसिंह शेखावत समेत केवल पांच नेता राजभवन के अन्दर गए थे. उस समय के तत्कालीन कलेक्टर और एसपी राजभवन के गेट पर ही मौजूद थे, जिन्होंने तुरन्त गेट खुलवा दिया था. राजभवन में कुछ मिनट इंतजार करते ही बलिराम भगत पोर्च में आ गए थे और भैरोंसिंह शेखावत और बलिराम भगत ने हाथ मिलाया था. केवल एक मिनट के अन्दर ही राज्यपाल ने शेखावत से कह दिया था कि हम आपको सरकार बनाने के लिए पत्र भिजवा रहे हैं. दरअसल राज्यपाल बलिराम भगत पहले ही बहुमत जांच चुके थे और भाजपा विधायकों की परेड नहीं करवानी पड़ी थी. गोपाल शर्मा का कहना है कि पहली बार राजभवन में धरने और नारेबाजी जैसी स्थिति बनी है.



शेखावत का नाम लेने पर दामाद ने जताई आपत्ति
गौरतलब है कि भैरोंसिंह शेखावत के दामाद और विधायक नरपत सिंह राजवी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बार-बार भैरोंसिंह शेखावत का नाम लेने पर ऐतराज जताया है. पत्र में राजवी ने लिखा है कि 27 साल पहले आज की तरह मर्यादाएं नहीं लांघी गई थीं.

विश्वास की कमी के चलते उपजा विवाद

वरिष्ठ पत्रकार गोपाल शर्मा भी इससे इत्तेफाक रखते हैं. हालांकि उनका कहना है कि सारी मर्यादाएं लांघने की बात सही नहीं है. उन्होंने कहा कि भैरोंसिंह शेखावत तीन बार मुख्यमंत्री बने थे और दो बार उनकी सरकार को बर्खास्त किया गया था. अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि सत्ता मद लेकर आती है. गोपाल शर्मा के मुताबिक सचिन पायलट ने कभी अशोक गहलोत को अपना नेता नहीं माना और अशोक गहलोत ने कभी सचिन पायलट को विश्वासपात्र नहीं समझा. यही वजह है कि राजस्थान में सियासी घमासान उपजा. उन्होंने कहा कि राजस्थान की सियासत में इस तरह का घटनाक्रम पहली बार हुआ है.
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