Rajasthan Big News: केवलादेव उद्यान से बूमा तकनीक के जरिये 800 चीतल किये जाएंगे अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जब भी किसी टाइगर रिजर्व की बात की जाती है तो पहले वहां पर अन्य वन्यजीव खासतौर पर हिरण का होना बहुत जरूरी होता है.

Rajasthan Big News: राजस्थान में बाघों के आवास को और बेहतर बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है. इसके तहत भरतपुर के प्रसिद्ध केवलादेव उद्यान से 800 चीतल को अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जायेगा. इसके लिये यहा पहली बार बूमा तकनीक का इस्तेमाल होगा.

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जयपुर. राजस्थान में सभी टाइगर रिजर्व (Tiger reserves) में बाघों के रहने के लिए बेहतर माहौल तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है. बाघों के शिकार योग्य 800 चीतल हिरन (Chital deer) केवलादेव पक्षी अभयारण्य से अन्य तीन टाइगर रिजर्व में भेजे जाएंगे. इसके लिए वन विभाग ने राज्य सरकार से 800 चीतल की परमिशन ली है. भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क (Keoladeo National Park) में करीब 3200 चीतल हैं. एनटीसीए से परमिशन ली गई है कि केवलादेव से करीब एक चौथाई यानी 500 चीतल मुकुंदरा टाइगर रिजर्व, 150 चीतल रामगढ़ और 150 चीतल कैला देवी सेंचुरी में छोड़े जाएंगे. इस तरह टाइगर रिजर्व में प्रेबेस बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.

राजस्थान में वन्यजीवों को शिफ्ट करने के लिये पहली बार नई बूमा तकनीक का प्रयोग किया जायेगा. मध्यप्रदेश में बूमा तकनीक से हिरणों को बिना ट्रेंकुलाइज किए ट्रांसपोर्टेशन व्हीकल की स्पेशल डिजाइन करके उसके माध्यम से दूसरी जगह पर छोड़ा जाता है. इस टेक्निक का प्रशिक्षण लेने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों को मध्यप्रदेश भेजा गया है.

रणथम्भौर नेशनल पार्क में लगातार बाघों का कुनबा बढ़ रहा है
वन विभाग के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक मोहन लाल मीणा के अनुसार रणथम्भौर नेशनल पार्क में लगातार बाघों का कुनबा बढ़ रहा है. कई बार बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट देखने को मिलती है. लिहाजा बाघों नए आवास में बसाने का लिए चौथा टाइगर रिजर्व बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभ्यारण्य बनाया गया है. दूसरे वन क्षेत्रों से टाइगर और अन्य वन्यजीवों को रामगढ़ विषधारी में शिफ्ट किया जाएगा.

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 1017 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व से जुड़े काम जल्द ही धरातल पर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद वन विभाग ने चौथे टाइगर रिजर्व का प्लान तैयार किया है. इसमें अन्य वन क्षेत्रों से टाइगर और अन्य वन्यजीवों को शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है. इससे प्रदेश में बाघों को बेहतरीन प्राकृतिक आवास मिलेगा. उनका बेहतर तरीके से संरक्षण और संवर्धन हो सकेगा. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 1017 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

सरिस्का टाइगर रिजर्व में 25 टाइगर है
मौजूदा हालात देखे जाएं तो रणथम्भौर नेशनल पार्क में 70 टाइगर हैं. यहां अनुमानित कैपेसिटी 40 की है. सरिस्का टाइगर रिजर्व में 25 टाइगर है. यहां अनुमानित कैपिसिटी 35 की है. मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में 1 टाइगर है. यहां अनुमानित कैपेसिटी 12 की है. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में एक टाइगर है. यहां अनुमानित कैपेसिटी 20 की है। ऐसे बाघों को अन्य टाइगर रिजर्व भेज उनके संरक्षण के बेहतर प्रयास किये जायेंगे.

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