Rajasthan: सहकारी समितियों के चुनाव तय समय पर कराने के लिये लाया जायेगा नया एक्ट, सरकार कर रही है मंथन

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के मुताबिक नये कानूनी प्रावधान के बाद सहकारी समितियों के चुनाव भी लोकसभा, विधानसभा, पंचायतीराज और निकाय चुनाव की तरह हर पांच साल में करवाने की कानूनी बाध्यता हो जायेगी.

Elections of co-operative societies: लंबे समय तक लंबित रहने वाले सहकारिता समितियों के चुनाव तय समय पर कराये जाने के लिये राज्य सरकार अब नई कवायद शुरू करने जा रही है. इसके लिए नया एक्ट लाए जाने पर विचार हो रहा है.

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जयपुर. प्रदेश में सहकारी समितियों के चुनाव समय पर हो इसके लिए जल्द ही राज्य सरकार कानूनी प्रावधान करेगी. इन समितियों के चुनाव समय पर नहीं होना सरकार को बार-बार कटघरे में खड़ा करता है. लिहाजा अब सरकार इस तरह का प्रावधान करने पर विचार कर रही है कि हर पांच साल में समितियों के चुनाव सुनिश्चित हो सकें.

प्रदेश में करीब 35 हजार सहकारी समितियां हैं. इनमें से करीब 18 हजार सहकारी समितियां ऐसी हैं जो चुनाव के योग्य हैं. यानि इनमें प्रत्येक पांच साल में चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न करवाई जानी चाहिए. लेकिन सहकारी समितियों के चुनाव समय पर सम्पन्न नहीं हो पाते और इसके चलते सरकार पर पर अंगुलियां उठती हैं. अब सरकार कानूनी प्रावधान कर सहकारी समितियों के निर्वाचन की प्रक्रिया को नियत करने जा रही है.

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नया एक्ट लाए जाने पर विचार हो रहा है
सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि राज्य सरकार इस पर विचार कर रही है कि सहकारी समितियों के चुनाव हर पांच साल में नियत समय पर हों. इसके लिए नया एक्ट लाए जाने पर विचार हो रहा है. इस कानूनी प्रावधान के बाद सहकारी समितियों के चुनाव भी लोकसभा, विधानसभा, पंचायतीराज और निकाय चुनाव की तरह हर पांच साल में करवाने की कानूनी बाध्यता होगी. अभी सरकारें अपनी सहूलियत के अनुसार सहकारी समितियों के चुनाव करवाती हैं और कई बार बरसों तक सहकारी समितियों के चुनाव लम्बित रहते हैं.

सरकारें देखती हैं राजनीतिक लाभ-हानि
सरकारें कई बार राजनीतिक लाभ-हानि के चलते भी सहकारी समितियों के चुनावों को टालती रहती हैं. प्रदेश में वर्तमान में हजारों सहकारी समितियों के चुनाव लम्बित हैं. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रदेश के में करीब साढे 6 हजार ग्राम सेवा सहकारी समतियां हैं और इनमें से करीब 6 हजार समितियों के चुनाव लंबित चल रहे हैं. इनमें से कई समितियां ऐसी हैं जिनके चुनाव साल 2016-17 में ही लम्बित हो चुके हैं लेकिन अब तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है.



करीब डेढ़ साल पहले चुनाव जल्द सम्पन्न करवाने की बात कही गई थी
गहलोत सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले सहकारी समितियों के चुनाव जल्द सम्पन्न करवाने की बात कही थी लेकिन बार-बार दूसरे चुनावों के चलते यह प्रक्रिया अब तक सम्पन्न नहीं हो पाई है. अब पंचायतीराज चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं. सहकारिता मंत्री का कहना है कि अब जल्द ही समितियों के चुनाव सम्पन्न करवा दिए जाएंगे. कानून बन जाने के बाद सहकारी समितियों के चुनाव डिले नहीं हो पाएंगे और चुनाव समय पर सम्पन्न करवाने ही होंगे. यानि सहकारी संस्थाओं में भी अब पूरी तरह से लोकतंत्र कायम होगा.

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