OPINION : एसीपी का घूस से पेट नहीं भरा तो रिश्वत में मांगी अस्मत, सरकार क्यों नहीं उठाती सख्त कदम ?

राजस्थान के पुलिस महकमे की हालत बाड़ के ही खेत को खाने जैसी होने लगी है. पुलिसकर्मी और अफसर खुद अपराध कर रहे हैं तो अपराधियों के हौंसले तो बुलंद होंगे ही.

राजस्थान में खाकी (Police) लगातार बदनाम होती जा रही है. पद और घूस के नशे में वह रक्षक से भक्षक बन बैठी है. पहले रिश्वत (Bribe) में केवल रुपये मांगने वाली पुलिस अब महिलाओं से अस्मत भी मांगने लगी है.

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    हरीश मलिक
    जयपुर. राजस्थान में यह दिलचस्प आंकलन हो सकता है ​कि आजकल एसीबी (ACB) ज्यादा काम कर रही है या फिर अफसरशाही. खासकर पुलिस (Police) ज्यादा एक्टिविली घूस ले रही है ? घूस में रुपए लेने के लिए तो पुलिस पहले ही बदनाम थी ही. अब दो कदम आगे जाकर रिश्वत (Bribe) में अस्मत भी मांगने लगी है. यह शर्मनाक कृत्य भी उस पुलिस अधिकारी ने किया जिसे सरकार ने महिलाओं पर अत्याचार (Women Atrocities) रोकने का जिम्मा दे रखा है. उसी ने दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तार करने की एवज में पीड़िता से सरकारी दफ्तर में बुलाकर बलात्कार का प्रयास (Rape attempt) किया.

    हाल ही में अलवर में एसआई द्वारा महिला से थाने में ही तीन दिन तक रेप करने का मामला सुर्खियों में आया था. अब इस नए केस में महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में तैनात एसीपी कैलाश बोहरा ने छुट्टी के दिन पीड़िता को अपने कार्यालय में बुलाकर मुंह काला करने की नापाक कोशिश की. इस शर्मनाक हरकत से पहले वह पीड़िता से 50 हजार की घूस भी ले चुका है.

    पद और घूस के नशे से रक्षक से भक्षक बन बैठे
    राजस्थान के पुलिस महकमे की हालत बाड़ के ही खेत को खाने जैसी होने लगी है. पुलिसकर्मी और अफसर खुद अपराध कर रहे हैं तो अपराधियों के हौंसले तो बुलंद होंगे ही. बोहरा दो साल पहले ही पदोन्नत होकर आरपीएस बने तो पद और घूस के नशे से रक्षक से भक्षक बन बैठे. बोहरा का ट्रैक रिकार्ड पहले से ही विवादों में रहा है. थानेदार के समय से ही विवादों से नाता रखने वाले बोहरा पर अवैध हिरासत में मारपीट का मामला दर्ज हुआ था. बजाज नगर थानाधिकारी रहते हुए वे भाजपाइयों के साथ मारपीट में चर्चित हुए.

    ऐसे अधिकारी को पदोन्नति देना सरकारी कार्यशैली पर सवाल
    फिर हाईकोर्ट ने सदर थाने में 2010 में उनके खिलाफ दर्ज दो एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपी. आर्म्स एक्ट में फंसाने का मामला भी सीबीआई में लंबित है. इसके सबके बावजूद उन्हें पदोन्नति मिलना क्या सरकारी कार्यशैली को भी सवालों के घेरे में नहीं लाता ? क्या उन्हें पदोन्नत करने वाली डीपीसी की कोई जिम्मेदारी नहीं है ? सरकार में इतना नैतिक साहस भी नहीं कि वह बलात्कारी या घूसघोर पुलिसकर्मियों के खिलाफ नजरें भी टेढ़ी कर ले. अलवर के बलात्कार के आरोपी एसआई को यदि तत्काल बर्खास्त किया गया होता तो वह औरों के लिए नजीर बनता.

    खाकी के घूस खाने के मामलों में कोई कमी नहीं आ पा रही है
    ऐसा लगता है कि पुलिस को वेतन ही बहू-बेटियों की अस्मत लूटने, घूस के नए-नए तरीके ईजाद कर और इन्हें अपनाकर अपनी जेबें भरने के लिए ही मिलता है. तभी तो एसीबी की इतनी कार्रवाईयों के बाद भी खाकी के घूस खाने के मामलों में कमी नहीं आ पा रही है. रविवार को ही एसीबी ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ दो और कार्रवाइयां की. श्रीगंगानगर में एएसआई बालूराम को घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा. बीकानेर में आबकारी निरीक्षक को शराब के ठेके को निर्बाध रूप से संचालित करने की एवज में 28 हजार की मासिक बंधी लेने के आरोप में गिरफ्तार किया.

    सरकार कोई नजीर कायम क्यों नहीं करती ?
    जयपुर के सदर थाने में भी एक महिला ने पुलिसकर्मी के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है. लाख टके का सवाल यही है कि पुलिस के खिलाफ लगातार इतने मामले आने के बावजूद सरकार की ओर से कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं ? क्या ऐसे एसीपी को तत्काल नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जाना चाहिए ? सरकार पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म के मामलों में सख्त से सख्त सजा देकर कोई नजीर कायम क्यों नहीं करती ?

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