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राजस्थान: टाइगर रिजर्व में सफारी की एडवांस बुकिंग कराना पड़ा भारी, रिफंड का ऑप्शन सुन टूरिस्ट हैरान

अब पर्यटक रिफंड के लिए होटलों पर दबाव डाल रहे है. (फाइल फोटो)

अब पर्यटक रिफंड के लिए होटलों पर दबाव डाल रहे है. (फाइल फोटो)

कोरोना संकट (Corona Crisis) के कारण पर्यटन उद्योग (Tourism Sector) पर भी काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. राजस्थान (Rajasthan) के टाइगर रिजर्व में घूमने आने वाले पर्यटकों ने एडवांस बुकिंग कर आफत मोल ली है.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में टाइगर दर्शन के लिए रणथंभौर और सारिस्का टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve) में बड़ी संख्या में पर्यटकों (Tourists) ने एडवांस बुकिंग कराई थी. लेकिन दुनियाभर के पर्यटकों की ख्वाहिश पर कोरोना ने पानी फेर दिया. साथ मे उनका पैसा भी अटका दिया. पर्यटकों का पैसा भी थोड़ा बहुत नहीं बल्कि 4 करोड़14 लाख रुपये वन विभाग के पास फंसा हुआ है. 18 मार्च में 30 जून के बीच कैंसिल की गई एडवांस बुकिंग्स का ये पैसा अब वन विभाग वापस नहीं कर रहा है. बदले में वन विभाग ने एक ऐसा ऑप्शन दिया है जिससे पर्यटन व्यवसाय और टाइगर टूरिज्म से जुड़े होटल मालिक और टूरिस्ट एजेंट्स खासे नाराज हैं.
कैंसिल हुई बुकिंग्स के संबंध में वन विभाग ने कहा है कि पर्यटकों को उनकी बुकिंग का पैसा वापस नहीं दिया जाएगा. बल्कि वे चाहे तो अगले 2 साल में कभी भी अपनी बुकिंग के बदले टाइगर सफारी कर सकते हैं. इसके लिए वन विभाग ने पर्यटकों को कोई भी 3 डेट्स चुनने का ऑप्शन भी दिया है.

'पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग हैं परेशान'
इस कारण पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग इस फैसले पर काफी नाराज हैं. उनका कहना है कि कोरोना संकट में लॉकडाउन के दौरान प्रदेश के टाइगर रिजर्व व अन्य वन्यजीव क्षेत्रों के लिए की गई ऑनलाइन बुकिंग की रिफंड के लिए परेशान हो रहे पर्यटकों को वन विभाग ने उनका पैसा वापस न कर आने वाले दो साल में सफारी की छूट दी है. इस फैसले से दुनियाभर में प्रदेश की छवि खराब होगी.
दरअसल, कोरोना के कारण बड़ी संख्या में सफारी की ऑनलाइन बुकिंग को कैंसिल करना पड़ा था. तब से ही पर्यटक रिफंड के लिए परेशान हो रहे थे. काफी समय से होटल व रिसॉटर्स भी पर्यटकों को उनका पैसा वापस दिलाने की मांग कर रहे थे. मामले में होटल मालिकों की ओर से दबाव बनाया. उसके बाद विभाग ने रिफंड की जगह अगले साल में सफारी का ऐसा विकल्प दिया है जिससे सभी नाराज़ हैं.

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मांगे जाएंगे तीन डेट्स

प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिन्दम तोमर का कहना है की एडवांस बुकिंग के मामले में टूरिस्ट से तीन तारीख मांगी जाएंगी. जो उनको दुबारा सफारी के लिए फिट बैठे. कोशिश की जाएगी की उनकी पहली चॉइस के मुताबिक ही उनको सफारी उपलब्ध कराई जाए. सफारी के लिए पर्यटकों को पहले अप्लाई कर कन्फर्मेशन लेनी होगी. इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल पर अलग से ऑप्शन दिया जाएगा.
'जरूरी नहीं पर्यटक दो साल में भारत आ सकें'
रणथंभौर होटल एसोसिएशन के सचिव अरविन्द जैन का कहना है कि यह फैसला सही नहीं है. देश में कई राज्यों में पर्यटकों को उनका पैसा रिफंड किया गया है, तो राजस्थान में भी उन्हें पैसा वापस मिलना चाहिए. बुकिंग वाले ज़्यादातर टूरिस्ट विदेशी हैं. एक बार टूर रद्द होने के बाद कोरोना के हालात में जरूरी नहीं की दो साल में वो इंडिया वापस आ सकें. ये सभी पर्यटक होटल के माध्यम से बुकिंग्स करते हैं. अब पर्यटन रिफंड के लिए होटलों पर दबाव डाल रहे है. इससे दुनियाभर में प्रदेश की इमेज खराब होगी और इन हालात में उनका पैसा तो होटल को ही भुगतना पड़ेगा.

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'प्रदेश की छवि दुनिया भर में हो सकती है खराब'
सारिस्का में पर्यटन से जुड़े दिनेश दुर्रानी का कहना है कि कोरोना के डर से पर्यटन को नार्मल होने में वक्त लगेगा. जरूरी नहीं की दो वर्षों में पर्यटक भारत आ पाए. उनका रिफंड नहीं करने से वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान की छवि खराब होगी.

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