बिहार में कहर बरपा रही चमकी बुखार को लेकर सरकार ने जारी किया अलर्ट

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सड्रोम) को लेकर स्वास्थ्य विभाग सहित सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं.

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Updated: June 19, 2019, 3:36 PM IST
बिहार में कहर बरपा रही चमकी बुखार को लेकर सरकार ने जारी किया अलर्ट
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा. (ट्विटर से साभार)
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Updated: June 19, 2019, 3:36 PM IST
चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सड्रोम) से बिहार में बच्चों की लगातार हो रही मौतों को ध्यान में रखते हुए अब राजस्थान में भी इस बारे में अलर्ट जारी किया गया है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग सहित सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही इस बीमारी से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पहले से ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार से पूरे बिहार में हाहाकार मचा है. इस जानलेवा बीमारी से अब तक सूबे में 141 से ज्यादा मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया है.

चमकी बुखार के लक्षण
बच्चे को लगातार तेज बुखार चढ़ा रहता है
बदन में ऐंठन के साथ बच्चा अपने दांत पर दांत चढ़ाए रहता है

शरीर में कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता रहता है
शरीर में कंपन के साथ बार-बार झटके लगते रहते हैं
इस बीमारी में ब्लड शुगर लो हो जाता है.
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बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं.
बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है.
कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा. जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है.
अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है, तो मौत तय है.

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ऐसे फैलती है चमकी बुखार

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) क्यूलेक्स मच्छरों की वजह से होता है. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम जैपेनीज इंसेफेलाइटिस का घातक रूप है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार इसकी वजह से हर साल दुनिया के 24 देशों में 13600 से 20400 बच्चों की मौत होती है. WHO ने साल 2006 में AES शब्द को एक ऐसे रोग समूह के रूप में दर्शाया, जिसमें कई बीमारियों के लक्षण दिखते हैं. इन लक्षणों को समझना मुश्किल होता है, लिहाजा इसका इलाज भी मुश्किल हो जाता है.

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First published: June 19, 2019, 3:36 PM IST
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