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    डूंगरपुर प्रकरण के बाद गहलोत सरकार इस तरह कर रही ट्राइबल एरिया पर फोकस

    गहलोत सरकार ने वन धन योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है. (फाइल फोटो)
    गहलोत सरकार ने वन धन योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है. (फाइल फोटो)

    गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने वन धन योजना को जनजाति उपयोजना क्षेत्र एवं सहरिया क्षेत्र के अलावा माडा क्लस्टर, बिखरी जनजाति क्षेत्रों में भी लागू करने का निर्णय लिया है.

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    जयपुर. डूंगरपुर प्रकरण के बाद गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने आदिवासी समाज (Tribal) को मुख्यधारा में लाने के लिए एक्शन लेना शुरू कर दिया है. राज्य सरकार वन धन योजना को जनजाति उपयोजना क्षेत्र एवं सहरिया क्षेत्र के अलावा माडा क्लस्टर, बिखरी जनजाति क्षेत्रों में भी लागू करने का निर्णय लिया है. इसके लिए जिला कलक्टरों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय एवं मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है.

    वन धन योजना पूर्व से ही जनजाति उप योजना क्षेत्र के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही एवं सहरिया क्षेत्र के बांरा जिलों में लागू है. जिसके लिए जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति गठित है. महाप्रबन्धक राजस संघ उक्त क्षेत्र हेतु राज्य नोडल अधिकारी हैं.

    यह है योजना का उद्देश्य



    वन धन योजना का उद्देश्य न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से लघु वन उपजों को संग्रहित करने के साथ ही प्रशिक्षण द्वारा संग्रहित वन उपजों के मूल्य संर्वधन के लिए उपकरण उपलब्ध करवाना है. वन धन केन्द्र का गठन 20 सदस्यों के 15 स्वयं सहायता समूहों को मिलाकर हुआ है. इसके सुचारू संचालन के लिए 08 सदस्यीय कार्यकारी समिति का भी गठन किया जाता है. इसमें न्यूनतम 60 प्रतिशत जनजाति सदस्यों का होना अनिवार्य है. 300 सदस्यीय वन धन विकास केन्द्र के लिए प्रशिक्षण हेतु 05 लाख रुपए और उपकरण सामग्री के लिए 10 लाख रुपए उपलब्ध करवाए जाते हैं.


    यहां कार्यरत हैं वन धन विकास केन्द्र

    अतिरिक्त मुख्य सचिव सिंह ने बताया कि उदयपुर जिले में 14, बांसवाड़ा में 02, प्रतापगढ़ में 02, सिरोही में 05 तथा डूंगरपुर में 02 वन धन विकास केन्द्र कार्यरत हैं. 25 वन धन विकास केन्द्रों के लिए स्वीकृत राशि 372.20 लाख में से 122.20 लाख प्रशिक्षण और 250 लाख के टूलकिट उपलब्ध करवाए जाने में व्यय होंगे. अब तक स्वीकृति प्राप्त 25 वन धन केन्द्रों में से 09 राजीविका, 04 ग्रामीण विकास ट्रस्ट, 02 वन विभाग, 02 आरबीएस फाउण्डेशन, 02 जय कला फाउण्डेशन, 02 श्रृद्धा महिला विकास समिति, 01 सृजन संस्थान, 01 सेवा मन्दिर, 01 आदिवासी तेंदू पत्ता संग्रहण समिति देवला तथा 01 महान सेवा संस्थान कोल्यारी को संरक्षक संस्था के रूप में मार्ग दर्शन के लिए दिए गए हैं.
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