Rajasthan: कृषि विधेयकों के विरोध में प्रदेश में बवाल जारी, सभी 247 मंडियां बंद

राजस्थान में करीब 50 किसान संगठन इसके विरोध में एक जाजम पर आए हैं. जयपुर स्थित कूकरखेड़ा कृषि मंडी.
राजस्थान में करीब 50 किसान संगठन इसके विरोध में एक जाजम पर आए हैं. जयपुर स्थित कूकरखेड़ा कृषि मंडी.

कृषि सम्बन्धी अध्यादेशों और विधेयकों (Agrarian bills) को लेकर प्रदेश में भी किसान और व्यापारी एकजुट हो गये हैं. इनके विरोध में आज प्रदेश की सभी 274 मंडियां बंद हैं.

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जयपुर. केंद्र सरकार (Central government) के कृषि सम्बन्धी अध्यादेशों और विधेयकों (Agrarian bills) को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध देखने को मिल रहा है. राजस्थान में भी इन विधेयकों के विरोध में आज प्रदेश की सभी 247 मंडियां बंद हैं. राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापर संघ द्वारा लगातार इन अध्यादेशों का विरोध किया जा रहा है और बीते दिनों भी इस मसले को लेकर 4 दिन प्रदेश की सभी मंडियां बंद रहीं थी. उधर कई किसान संगठन भी इन विधेयकों के विरोध में है.

किसान महापंचायत ने किसानों से अपनी उपज मंडियों में नहीं लाने का आव्हान किया है. इस मंडी बंद को मजदूरों और पल्लेदारों का भी पूरा समर्थन होने का दावा किया जा रहा है. विरोध स्वरूप कई मंडियों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं. वहीं विधेयकों की प्रतियां जलाकर भी विरोध जताया का रहा है. किसान ट्रैक्टरों पर काले झंडे लगाकर भी इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं. राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की 23 सितम्बर को बैठक होगी. उसमें आन्दोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी.

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ये हैं विधेयक और इसलिए है विरोध
'एक राष्ट्र, एक बाजार' का नारा देते कुए केंद्र सरकार बीती 5 जून को कृषि सम्बन्धी तीन अध्यादेश लेकर आई थी. अब इन अध्यदेशों को विधेयकों के रूप में संसद में पारित करवाया जा रहा है. 2 विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित भी हो चुके हैं. केन्द्र सरकार कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्द्धन एवं सरलीकरण) विधेयक- 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक- 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक- 2020 को केंद्र सरकार क्रांतिकारी कदम और दूरगामी फायदे वाला बता रही है. वहीं किसानों और व्यापारियों में इन्हें लेकर कई तरह की आशंकाएं हैं. इन विधेयकों में कृषि जिंसों की फ्री ट्रेड का प्रावधान किया गया है. इससे मंडियों के बंद होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद बंद होने और कृषि में कॉर्पोरेट कल्चर के हावी होने का डर सता रहा है. इसी तरह इसमें शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.

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संसद से लेकर सड़क तक विरोध
कृषि सम्बन्धी इन विधेयकों का संसद से लेकर सड़क तक विरोध देखने को मिल रहा है. इन विधेयकों पर राज्यसभा में बवाल के बाद विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं एनडीए के घटक दल शिरोमणि अकाली दल द्वारा भी इसका विरोध किया जा रहा है और पिछले दिनों हरसिमरत कौर केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुकी है. देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान संगठन भी इन विधेयकों के खिलाफ लामबंद होकर सड़कों पर उतर रहे हैं. राजस्थान में करीब 50 किसान संगठन इसके विरोध में एक जाजम पर आए हैं तो मंडी व्यापारी भी अब आंदोलन को देशव्यापी बनाने की कवायद कर रहे है.
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