अजय माकन का दो द‍िन का दौरा, दो बार गहलोत से म‍िले और फॉर्मूला भी द‍िया, जानें फ‍िर कहां अटका है पेंच?

राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन दो दिन तक होटल से लेकर मुख्यमंत्री आवास के बीच चक्र लगाते रहे

Gehlot Vs Pilot: अजय माकन ने गहलोत से दो दिन पहले दो बार मुलाकात की, लेकिन पायलट कोटे से मंत्रियों की संख्या वे तय नहीं करवा पाए. हालांकि मोटे तौर पर गहलोत पायलट गुट के हटाए गए दो मंत्रियो की जगह दो मंत्री बनाने को तैयार है, लेकिन उनमें भी गहलोत की कुछ शर्ते पोर्टफोलियो वे खुद तय करेंगे.

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राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह के लिए कांग्रेस के राज्य प्रभारी अजय माकन दो दिन जयपुर में रहे. दो बार अशोक गहलोत से मिले और फॉर्मूला भी दिया, लेकिन मंत्र‍िमंडल में पायलट की हिस्सेदारी पर बात अटक गई. हालांकि राजनीतिक नियुक्तियों और पार्टी संगठन में नियुक्तियों पर गहलोत ने सहमति दे दी. समझा जा रहा है कि गहलोत के तर्क पर सोनिया गांधी से चर्चा के बाद मंत्रि‍मंडल विस्तार के बीच का फॉर्मूला निकाला जाएगा. वहीं कांग्रेस आलाकमान को डर है कि कहीं देर की तो गहलोत और पायलट की इस जंग से पार्टी में असंतोष न भड़क सकता है.

राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन दो दिन तक होटल से लेकर मुख्यमंत्री आवास के बीच चक्र लगाते रहे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से दो बार मुलाकात की और मुद्दा गहलोत मंत्रि‍मंडल का विस्तार, निगमों और बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियां और संगठन में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नियुक्ति को लेकर काफी बातचीत हुई. इसमें सबसे पेचिदा मसला है मंत्रि‍मडंल विस्तार का. सचिन पायलट चाहते है कि मंत्रिमंडल में उनके कोटे से 4 से 6 नए मंत्री बनाए जाए, लेकिन गहलोत पायलट के साथ मंत्रि‍मंडल में अब शेयरिंग को ही तैयार नहीं हैं. गहलोत चाहते हैं कि सचिन पायलट जिन्हें मंत्री बनाना चाहते हैं कि उनके नाम दे दे. विस्तार के वक्त वे देख लेंगे कि किसे मौका देने किसे नहीं. उधर, सचि‍न पायलट नाम देने के बजाय मंत्रि‍मंडल की 30 सीटों में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं.

क्‍या है गहलोत की ज‍िद्द?
अजय माकन ने गहलोत से दो दिन पहले दो बार मुलाकात की, लेकिन पायलट कोटे से मंत्रियों की संख्या वे तय नहीं करवा पाए. हालांकि मोटे तौर पर गहलोत पायलट गुट के हटाए गए दो मंत्रियो की जगह दो मंत्री बनाने को तैयार है, लेकिन उनमें भी गहलोत की कुछ शर्ते है और वो पोर्टफोलियो पर खुद फैसला करना चााहते हैं. गहलोत के रवैए से पायलट खेमा नाखुश है. हालांकि पायलट की उम्मीद अभी भी माकन पर टिकी है कि रास्ता निकाल लेंगे.

गहलोत सरकार में क‍ितने मंत्री पद है खाली
दो दिन की कसरत में अजय माकन गहलोत को राजनीतिक नियुक्तियों औऱ संगठन में जिलाअध्यक्षों की नियुक्ति से लेकर खाली पदों पर नियुक्तियों के लिए सहमत करने में कामयाब रहे. माकन इस कोशिश में कि पायलट की मांग औऱ अशोक गहलोत के इंकार के बीच ऐसा रास्ता निकाला जाए कि इसी महीने गहलोत मंत्रि‍मंडल का विस्तार हो सके. मोटे तौर पर राजस्थान में गहलोत सरकार में 30 मंत्री बन सकते हैं और अभी 21 मंत्री है. यानी 9 मंत्री और बन सकते हैं. पेंच इस पर भी है कि पायलट ये मानने को तैयार ही नहीं कि गहलोत मंत्रि‍मंडल में फिलहाल उनके कोटे कोई मंत्री है, लेकिन गहलोत ने तर्क रखा कि ढाई साल पहले पायलट कोटे से छह मंत्री बनाए गए थे. इनमें से एक मंत्री मास्टर भंवर लाल की मौत हो चुकी है.

क्‍या है पूरा मामला
पिछले साल बगावत पर पायलट समेत तीन को बर्खास्त किया था. बावजूद तीन मंत्री पायलट कोटे से अभी भी मंत्रि‍मंडल में है. ये मंत्री है प्रताप खाचरियावास, प्रमोद जैन भाया और उदयलाल आंजना, लेकिन पाला बदलने से पायलट अब इन्हें गहलोत कोटे में मानता है. ये ही वजह है कि गहलोत अब इस पर अड़े कि अब पायलट की शेयरिंग मंत्रि‍मंडल में नहीं की जाएगी. सिर्फ सिफारिश के नामों पर ही विचार करेंगे. दूसरा मसला बीएसपी से कांग्रेस में आए छह विधायकों और सरकार को समर्थन दे रहे है. 13 निर्दलीय विधायकों की हिस्सेदारी का मसला है. गहलोत चाहते हैं कि पिछले साल सरकार बचाने वाले इन निर्दलीय और बीसएपी के विधायकों की भी सरकार में भागीदारी हो.

मंत्रि‍मंडल से लेकर राजनीतिक नियुक्तयों में लेकिन सचिन पायलट खेमे का तर्क है कि इन 19 विधायकों के बिना भी गहलोत सरकार पूर्ण बहुमत में है. इनके बिना 200 में से 101 विधायक कांग्रेस के है. फिर इनकी हिस्सेदारी क्यों? खासतौर पर निर्दलि‍यों की भागीदारी को लेकर मतभेद है. अजय माकन इस कोशिश में है कि सरकार की स्थिरता पर भी संकट न हो और पायलट गुट को सम्मानजक जगह भी मिल जाए, लेकिन पायलट मंत्रि‍मंडल में बड़ी हिस्सेदारी से खोया रुतबा हासिल करना चाहते है तो गहलोत पायलट को अब बराबर का न नेता न ही उनकी ये ताकत मानते है और असली पेंच ये ही है.

इसका असर ये रहा है कि माकन जयपुर में दो दफा गहलोत से मिले उनके गुट के नेताओं से मिले लेकिन एक बार भी सचिन पायलट या उनके समर्थकों से नहीं मिले. माकन नहीं चाहते थे कि गहलोत नाराज हो, लेकिन माकन को डर है कि इस विवाद का रास्ता नहीं निकला तो राजस्थान कांग्रेस में भी सत्ता में भागीदारी का ढ़ाई साल से इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं का सब्र न टूट जाए और पंजाब की तरह के ही हालात न खड़े हो जाए.

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