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राजस्थान में गहरा रहा पानी का भीषण संकट, 278 बांधों में हालात चिंताजनक, देखें क्या कहती है ताजा रिपोर्ट

 प्रदेश के ज्यादातर छोटे व मंझले बांध के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने के कारण बारिश का पानी नहीं पहुंच पाता है.

प्रदेश के ज्यादातर छोटे व मंझले बांध के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने के कारण बारिश का पानी नहीं पहुंच पाता है.

राजस्थान में इस साल गर्मियों के समय पानी की खूब किल्लत रही. कई जगहों पर पेयजल पहुंचाने के लिए सरकार को वाटर ट्रेनें तक चलानी पड़ी. इसी के बीच राजस्थान में जलसंकट का गहरा साया मंडरा रहा है. प्रदेश के कई बांध सूखे पड़े हैं. वहीं कई बांधों में पानी का स्तर काफी कम हो गया है. प्रदेश में 67 फीसदी बांधों में 20 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. प्रदेश के कुल 278 बांधों में से इनकी तादाद 186 है. इन बांधों से सिंचार्द से लेकर जलापूर्ति को संकट पैदा होने वाला है.

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जयपुर. राजस्थान बड़े और मंझले बांधों की ताजा़ रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के ज्यादातर बांधों के हालात चिंताजनक हैं. बांधों में पानी लगातार घट रहा है और इस बार की गर्मी पानी के हालात पर बहुत भारी पड़ी है. चिंताजनक बात ये है कि प्रदेश में 67 फीसदी बांधों में 20 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. प्रदेश के कुल 278 बांधों में से इनकी तादाद 186 है. इन बांधों से सिंचार्द से लेकर जलापूर्ति को संकट पैदा होने वाला है. अगर मानसून की जल्दी महरबानी के बाद पानी आवक शुरू न हुई तो हालात बहुत मुश्किल होने वाले हैं.

प्रदेश सबसे अहम बांध बीसलपुर में करीब 22 परसेंट पानी बचा है. जयपुर, टोंक व अजमेर की एक करोड़ से ज्यादा आबादी को पेयजल सप्लाई करने वाली बीसलपुर बांध में प्री मानसून में 12 सेंटीमीटर पानी पहुंचा था, लेकिन बांध को ज्यादा बारिश और ज्यादा आवक की ज़रूरत है. बांध का जल स्तर अब 309.14 आरएल मीटर रह गया है और यहां से जलापूर्ति के लिए रोजाना 9341 लाख लीटर पानी लिया जा रहा है.

जयपुर को भी इसी बांध से मिलता है पानी
प्रदेश की राजधानी जयपुर को ही जयपुर को बांध से रोजाना 5923 लाख लीटर पानी मिल रहा है. प्रदेश में पाली की पेयजल सप्लाई से जुड़ा जवाई बांध काफी पहले ही दम तोड़ चुका है. प्रदेश के ज्यादातर छोटे व मंझले बांध के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने के कारण बारिश का पानी नहीं पहुंच पाता है, ऐसे वहां पानी नहीं होने से वहां न तो जलापूर्ति होती है न ही पानी आवक, बल्की ये बांध वक्त से पहले सूख जाते हैं. जबकि हर साल जल संसाधन विभाग बांध के मेंटीनेंस व बहाव क्षेत्र की सफाई के मद में करोड़ों रुपए खर्च करता है. उसके बावजूद इन बांधों में पानी क्यों नहीं आता ये अपने आप में बड़ा सवाल है.

176 बांध पूरी तरह सूखे
इन में से 176 पूरी तरह से बांध सूख चुके हैं. कम बारिश होने के कारण इनमें से 56 बांधों में अब तक ही पानी नहीं पहुंचा था, वहीं 4.25 एमक्यूएम से कम भराव क्षमता वाले 449 बांधों में केवल 4.27 प्रतिशत पानी ही है. इनमें से भी 400 बांध सूख चुके हैं. जयपुर के रामगढ़ बांध की तरह प्रदेश के 20 फसदी बांध अतिक्रमण की मार झेल रहे हैं. ये बांध अतिक्रमण के कारण हरसाल सूखे रह जाते हैं. बहाव क्षेत्र में पक्के व कच्चे निर्माण व अतिक्रमण के कारण प्रदेश के ज्यादातर छोटे बांधों में बारिश का पानी नहीं पहुंचा. प्रदेश में 4.25 एमक्यूएम से कम भराव क्षमता के 464 बांध है, लेकिन इन बांधों में केवल 29.24 फीसदी पानी ही आया है. यानी बांधों का 70 फीसदी हिस्सा खाली है. इसमें से 40 फीसदी बांध तो सूखे ही हैं, जबकि गांव वाले इन बांधों के संरक्षण को लेकर जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार कर चुके हैं.

जानें किस बांध में है कितना पानी
बचाबीसलपुर बांध (टोंक) – 22.20%
वाई बांध (पाली) – 4.33%
जसमंद (राजसमंद) – 5.71%
हारो (बांसवाड़ा) – 17.88%
टोरड़ी सागर (टोंक) – 0.00%
मोरेल (दौसा) – 9.69%
सिकरी बांध (भरतपुर) – 0.00%
रामगढ़ बांध (जयपुर) – 0.00%
छापरवाड़ा (जयपुर) – 0.00%
कालख सागर (जयपुर) – 0.00%
सरदार समंद (पाली) – 0.00%
मेजा बांध (भीलवाड़ा) – 0.00%
पानीराणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़) – 65.52%
कोटा बैराज (कोटा ) – 96.46%
माही बजाज सागर (बांसवाड़ा) – 39.98%
पार्वती बांध (धौलपुर) – 33.39%
सोम कमला अंबा बांध (डूंगरपुर) – 57.41%
जयसमंद (उदयपुर) – 51.58%
जाखम बांध (प्रतापगढ़) – 47.81%

Tags: Jaipur news, Rajasthan news

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