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Analysis: विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस और बीजेपी में थोड़ी खुशी-थोड़ा गम

Goverdhan Chaudhary | News18 Rajasthan
Updated: October 24, 2019, 7:46 PM IST
Analysis: विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस और बीजेपी में थोड़ी खुशी-थोड़ा गम
कांग्रेस की मंडावा की जीत और खींवसर की कम अंतर से हार का निकाय चुनाव में मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

प्रदेश की मंडावा (Mandawa) और खींवसर विधानसभा सीट (Kheevnsar Assembly Seat) पर उपचुनाव (By-elections) के नतीजे कांग्रेस (Congress) व बीजेपी (BJP) के लिए थोड़ी खुशी-थोड़ा गम वाले हैं. झुंझुनूं जिले की मंडावा सीट कांग्रेस ने बीजेपी से छीन ली है, जबकि खींवसर सीट पर हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) की पार्टी रालोपा (RLP) ने कब्जा बरकरार रखा है.

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जयपुर. प्रदेश की मंडावा (Mandawa) और खींवसर विधानसभा सीट (Kheevnsar Assembly Seat) पर उपचुनाव (By-elections) के नतीजे कांग्रेस (Congress) व बीजेपी (BJP) के लिए थोड़ी खुशी-थोड़ा गम वाले हैं. झुंझुनूं जिले की मंडावा सीट कांग्रेस ने बीजेपी से छीन ली है, जबकि खींवसर सीट पर हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) की पार्टी रालोपा (RLP) ने कब्जा बरकरार रखा है. खींवसर सीट पर रालोपा उम्मीदवार नारायण बेनीवाल (Narayan Beniwal) ने कांग्रेस उम्मीदवार हरेन्द्र मिर्धा (Harendra mirdha) को 4,630 वोटों से हराया है.

कांग्रेस ने इस बार कड़ी टक्कर दी
खींवसर सीट बनने के बाद पहली बार कांग्रेस ने यहां इतनी कड़ी टक्कर दी है. अब तक हुए चुनावों में खींवसर में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रहती आई है, लेकिन इस बार उसने खींवसर में डटकर मुकाबला किया. इसका नतीजा यह हुआ कि रालोपा और बीजेपी के गठबंधन के उम्मीदवार की जीत का अंतर महज 4,630 वोटों तक सिमटकर रह गया.

निकाय चुनाव में मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा

मंडावा की जीत और खींवसर की कम अंतर से हार का निकाय चुनाव में मनोवैज्ञानिक असर जरूर पड़ेगा. इन नतीजों को कांग्रेस राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के तौर पर पेश करेगी. उपचुनाव के नतीजे सीएम अशोक गहलोत के लिए भी कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में राहत वाले हैं. हाईकमान की नजर में इसे ठीकठाक प्रदर्शन के तौर पर पेश किया जा सकेगा.

हरेन्द्र मिर्धा की राजनीतिक संभावनाओं पर विराम
हरेन्द्र मिर्धा 15 साल बाद चुनाव मैदान में उतरे और उसके बाद भी हार का सामना करना पड़ा. हरेन्द्र मिर्धा के राजनीतिक करियर के लिए यह हार काफी अहम है. इस हार के बाद उनकी चुनावी राजनीतिक संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं. हरेन्द्र मिर्धा की हार के पीछे अति-आत्मविश्वास और बूथ मैनेजमेंट की कमी माना जा रहा है. हरेन्द्र मिर्धा खुद के इलाके कुचेरा और आसपास के 5 बड़े गांवों में वोटर्स को बूथ तक नहीं ला पाए और यही उनकी हार का कारण बना. हरेन्द्र मिर्धा के पैतृक कस्बे कुचेरा में 55 फीसदी वोट भी नहीं पड़े. यही हाल कुचेरा के आसपास के खजवाना, संख्वास और रून जैसे बड़े गांवों का रहा. हरेन्द्र मिर्धा के समर्थक माने जाने वाले इलाकों में वोटिंग कम हुई जो उनकी हार की बड़ी वजह बना.
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विधानसभा में 107 हुए कांग्रेस विधायक
उपचुनाव में मंडावा सीट पर जीत से कांग्रेस की विधानसभा में विधायकों की संख्या बढ़कर 107 हो गई है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें अपने खुद के दम पर जीती थी. फिर रामगढ़ सीट जीतकर 100 का आंकड़ा पार कर लिया था. उसके बाद बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय से आंकड़ा 106 तक पहुंच गया था. अब मंडावा की जीत के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या 107 हो गई है.

रालोपा ने अपनी सीटों की संख्या बरकरार रखी
खींवसर की जीत के बाद रालोपा ने विधानसभा में अपनी 3 सीटों का आंकड़ा बरकरार रखा है. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उपचुनाव के नतीजों के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर निशाना साधा. हनुमान बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राजे खेमे के नेताओं ने खींवसर में भीतरघात किया, जिसके चलते जीत का अंतर कम रहा. बेनीवाल ने आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि राजे और सीएम अशोक गहलोत ने मिलकर हरेन्द्र मिर्धा को जिताने की भरपूर कोशिश की, लेकिन खींवसर की जनता ने उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया. बकौल बेनीवाल उनका बीजेपी से गठबंधन जारी रहेगा. वे मोदी के साथ हैं.

गहलोत ने ट्वीट कर कहा 4,630 का अंतर हमारे लिए जीत बराबर
सीएम अशोक गहलोत ने उपचुनाव नतीजों पर ट्वीट कर खुशी जताई है. गहलोत ने लिखा कि मंडावा उपचुनाव में भारी मतों से विजयी हुई रीटा चौधरी जी को हार्दिक बधाई. खींवसर उपचुनाव सभी ने एकजुट होकर मजबूती से लड़ा. लोकसभा चुनावों में जहां इस सीट पर लगभग 55,000 का डिफ़रेंस रहा, वहीं सिर्फ 5 महीने बाद करीब 4,630 का अंतर हमारे लिए जीत के समान ही है.

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First published: October 24, 2019, 7:34 PM IST
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