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Analysis: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में अशोक गहलोत की साख और BJP का प्रयोग दांव पर

Analysis: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में अशोक गहलोत की साख और BJP का प्रयोग दांव पर

उपचुनाव के परिणाम तय करेंगे कि मेवाड़ा का सुल्तान कौन है?

उपचुनाव के परिणाम तय करेंगे कि मेवाड़ा का सुल्तान कौन है?

Rajasthan assembly by-elections: राजस्थान की वल्लभनगर और धरियावद सीट पर हुये उपचुनाव के लिये आज मतगणना हो रही है. आज ये फैसला हो जायेगा कि मेवाड़ का सुल्तान कौन है. इन उपचुनावों में सीएम अशोक गहलोत की साख और बीजेपी का प्रयोग दांव है. अब नतीजे ही तय करेगा कौन किस पर भारी है.

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जयपुर. राजस्थान में दो विधानसभा सीटों वल्लभनगर और धरियावद उपचुनाव (Vallabhnagar and Dhariyavad by-elections) के नतीजे सूबे की सियासत पर खासा असर डाल सकते हैं. उपचुनाव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की साख और बीजेपी (BJP) का नया प्रयोग दांव पर है. अगर कांग्रेस दोनों सीटें जीती तो राजस्थान कांग्रेस में चल रही वर्चस्व की जंग में गहलोत पायलट से काफी आगे निकल जाएंगे. अगर कांग्रेस दोनों सीट हारी तो फिर पंजाब जैसे बदलाव की आवाज तेजी होगी. नतीजे ही तय करेंगे कि अगले मंत्रीमंडल फेरबदल में किसके समर्थकों का दबदबा होगा. संगठन की कमान गहलोत के करीबी गोविंद सिंह डोटासरा के पास रहेगी या नहीं. सचिन पाययट की क्या भूमिका होगी.

वल्लभनगर सीट कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के निधन से तो धरियावद सीट बीजेपी विधायक कन्हैयालाल मीणा के निधन से खाली हुई है. अगर बीजेपी कांग्रेस अपनी अपनी सीट बचाने में कामयाब होते हैं तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया के लिए विन विन सिचुएशन होगी. लेकिन कांग्रेस अगर अपनी वल्लभनगर सीट बचाने के साथ बीजेपी से धरियावद सीट छीन ले तो गहलोत सरकार और राजस्थान कांग्रेस की सियासी तस्वीर ही कुछ अलग होगी.

दोनों सीट जीते तो पायलट गुट का दबाव कम होगा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी हाईकमान के तमाम दबाब को दरकिनार कर दो सीटों के उप चुनाव तक मंत्रिमंडल फेरबदल, सरकार और संगठन में नियुक्तियों पर ब्रेक लगाए रखा. गहलोत की उम्मीद है कि अगर दोनों सीट जीते तो सचिन पायलट और उनके समर्थकों को भागीदारी देने का पार्टी हाईकमान का दबाब कम हो जाएगा. गहलोत ये उपचुनाव जीत कर पार्टी हाईकमान को संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार की लोकप्रियता बरकरार है.

उपचुनाव की पूरी कमान टीम गहलोत के हाथ में रही
सरकार के खिलाफ न सत्ता विरोधी लहर है न ही 2023 में कांग्रेस की वापसी के लिए पायलट जरूरी. दोनों सीट जीते तो प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा की पीसीसी चीफ की कुर्सी मजबूत होगी और संगठन में डोटासरा को हटाकर पायलट को संगठन की कमान सौंपने की मांग भी कमजोर पड़ेगी. जीत का सेहरा गहलोत डोटासरा के सिर बंधे इसलिए उपचुनाव की पूरी कमान टीम गहलोत के हाथ में रही. पायलट टीम किनारे थी लेकिन दोनों सीट हारे तो फिर पंजाब की तर्ज पर राजस्थान में पायलट कैंप बदलाव की मांग उठा सकता है. ऐसे में गहलोत के सामने सरकार और संगठन में पायलट के साथ साझेदारी के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा. पार्टी हाईकमान का भी का दबाब बढ़ जाएगा गहलोत पर पायलट को लेकर.

बीजेपी ने अपनाया है ये फार्मूला
दूसरी तरफ बीजेपी ने 2023 की रणनीति का पहला प्रयोग उपचुनाव में कर रही है. धरियावद सीट बीजेपी विधायक गौतमलाल मीणा के निधन से खाली हुई थी. गौतमलाल मीणा के बेटे कन्हैयाल मीणा को टिकट तय माना जा रहा था लेकिन पार्टी हाईकमान ने परिवारवाद पर लगाम के लिए कन्हैयालाल मीणा की जगह खेत सिंह मीणा को टिकट दिया गया. खेत सिंह की जीत या हार ही तय करेगी 2023 में ये फार्मूला बीजेपी कितना लागू करेगी. वसुंधरा खेमा इन चुनावों में लगभग शांत रहा है.

वल्लभनगर में 2018 के चुनाव में बीजेपी तीसरे स्थान पर रही थी
ऐसा ही बीजेपी में वल्लभनगर में किया. विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया के करीब होने के बावजूद उदयलाल डांगी को टिकट नहीं दिया गया और न ही पार्टी के एक धड़े के जनता सेना के नेता रणधीर सिंह भिंडर को टिकट देने की बात मानी. भिंडर वंसुधराराजे के करीबी माने जाते हैं और 2018 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे. बीजेपी प्रत्याशी उदयलाल डांगी तीसरे स्थान पर रहे थे. बीजेपी ने वल्लभनगर में एक जमीनी कार्यकर्ता हिम्मत सिंह झाला का मैदान में उतारा है.

डांगी और भिंडर से बीजेपी को खासा नुकसान हो सकता है
वल्लभनगर का बीजेपी का ये दांव बेहद रिस्की है. वल्लभनगर का बीजेपी का दांव भारी पड़ सकता है. जिस तरह के रुझान रहे है उसके चलते डांगी और भिंडर से बीजेपी को खासा नुकसान हो सकता है. ऐसे में बीजेपी को ये सीट तो चमत्कार ही जीता सकती है. नौबत यहां तक है कि बीजेपी प्रत्याशी पिछली बार की तरह मतगणना में तीसरे स्थान पर न चली जाए. इस सीट पर बीजेपी इस रणनीति में जुटी है कि 2023 के चुनाव में चेहरे और बड़े नेताओं की सिफारिश के बजाय संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं नेताओं को टिकट देकर फेसलेस पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़े.

नतीजे ही तय करेगा कौन किस पर भारी है
अगर इन दो चुनाव में बीजेपी को कामयाबी मिलती है तो राजस्थान में बीजेपी के क्षत्रपों और ताकतवर विधायकों के दिन लद सकते हैं. हालांकि ये फिलहाल आसान नहीं दिख रहा. वल्लभनगर सीट पर आरएलपी प्रत्याशी उदयलाल डांगी और भिंडर बीजेपी के गेम प्लान को चौपट करते नजर आ रहे हैं. इसी तरह धरियावद में बीटीपी प्रत्याशी ने कांग्रेस के वोट बेंक में सेंधमारी कर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है. ये नतीजे राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष सतीश पूनिया की किस्मत भी तय कर सकते हैं. हार या जीत का सीधा असर पूनिया के अगले साल फिर कार्यकाल के मनोनयन पर पड़ सकता है. अब नतीजे ही तय करेगा कौन किस पर भारी है.

Tags: Ashok gehlot, Rajasthan latest news, Rajasthan News Update, Rajasthan Politics, Satish Poonia

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