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Analysis : वसुंधरा राजे के देवदर्शन में छिपा है राजनीतिक 'दर्शन'

राजे की देवदर्शन यात्रा पर सियासी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि वे यात्रा में शिरकत नहीं करेंगे.

राजे की देवदर्शन यात्रा पर सियासी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि वे यात्रा में शिरकत नहीं करेंगे.

राजस्थान बीजेपी (BJP) में इन दिनों गुटबाजी की चर्चायें जोरों पर हैं. इस बीच पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के देवदर्शन के कार्यक्रमों और उनकी संभावित धार्मिक यात्रा में राजनीतिक 'दर्शन' की खोज की जा रही है.

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हरीश मलिक

जयपुर. वसुंधरा राजे की देवदर्शन यात्रा का मंतव्य धार्मिक तो है ही लेकिन इसकी पृष्ठभूमि में राजनीतिक उद्देश्य भी छिपे हो सकते हैं. इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. यदि यह धार्मिक यात्रा राज्य स्तर पर होगी तो इसे 2023 के विधानसभा चुनाव (Assembly elections) की पहली तैयारी के रूप में देखा जाएगा. राजे इससे दलबल के साथ अपनी ताकत का अहसास कराएंगी. वे यह साबित करने की कोशिश करेंगी कि राज्य में अभी भी उनके जैसा जनाधार वाला कोई दूसरा नेता नहीं है. संभवत: राजे की इसी अंतर्निहित मंशा के चलते पार्टी उनकी धार्मिक यात्रा पर सवाल उठा रही है.

वसुंधरा राजे का आठ मार्च को जन्मदिन है. वह अपने ​जन्मदिन को विशेष बनाती रही हैं. सत्ता में रहते उन्होंने आठ मार्च को प्रदेश का बजट भी पेश किया था. सूत्र बताते हैं कि इस बार अपने जन्मदिन पर शक्ति प्रदर्शन के रूप में राजे का विचार धार्मिक यात्रा पर निकलने का है. इसकी भनक जब पार्टी को लगी तो प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने दिल्ली तक शिकायत की कि पार्टी अनुमति के ​बिना कोई कार्यक्रम नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद राजे ने रविवार को सांकेतिक धार्मिक यात्रा के तहत जयपुर के दो मंदिरों में दर्शन किए. दर्शन का कार्यक्रम पूर्व में उजागर नहीं होने के बावजूद मंदिरों में भीड़ उमड़ी और राजे का आवागमन शक्ति प्रदर्शन के रूप में नजर आया.



मंडलों में फोन और शक्ति प्रदर्शन
सूत्रों के मुताबिक राजे के मंदिरों में दलबल के साथ पहुंचने से दो घंटे पहले बीजेपी कार्यालय से परकोटे के किशनपोल और चांदपोल मंडलों में फोन घनघनाए. मंडल पदाधिकारियों से कहा गया कि शाम छह बजे कार्यकर्ताओं की बैठकें करें. हालांकि ऐसा हुआ नहीं. इसके विपरीत दोनों विधानसभा क्षेत्रों के कई पदाधिकारी राजे के साथ मंदिर दौरे में नजर आए. हालांकि, शहर अध्यक्ष राघव शर्मा के मुताबिक मंडलों की बैठकें पहले से ही तय थीं. इनमें कहीं कोई राजनीति नहीं है.

बड़े नेताओं ने किया किनारा
राजे की देवदर्शन यात्रा पर सियासी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा है कि वे यात्रा में शिरकत नहीं करेंगे. ये राजे का निजी कार्यक्रम है. राठौड़ ने कहा कि देवदर्शन हमारी हिन्दू सभ्यता और संस्कृति में हैं. ऐसे में इस पर सियासी विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए. हम सब घरों से देवी-देवताओं के दर्शन करके निकलते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे यात्रा में भाग लेंगे तो उन्होंने इनकार कर दिया.

नड्डा खुद भी करेंगे मंदिर दर्शन
वसुंधरा की मंदिर यात्रा के विवादों के बीच जेपी नड्डा अपने कार्यक्रम में खुद भी मंदिर दर्शन के लिए जाएंगे. सोमवार को प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह की अध्यक्षता में जेपी नड्डा के दौरे को यादगार बनाने के लिए कार्यक्रमों को इस अंतिम रूप दिया गया था. इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा की याद में लगाई प्रदर्शनी के उद्घाटन के अलावा मालवीय नगर स्थित काली बाड़ी मंदिर मे दर्शन का भी कार्यक्रम है. इस मौके पर उनके साथ दोनों खेमों के कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे. यह भी देखना दिलचस्प होगा कि अब वसुंधरा राजे अपने जन्मदिन को कैसे विशेष बनाती हैं. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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