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गहलोत सरकार का एक और बड़ा कदम: शवों पर नहीं की जा सकेगी राजनीति, चलेगा कानून का डंडा

Prem Meena | News18 Rajasthan
Updated: December 10, 2019, 11:19 AM IST
गहलोत सरकार का एक और बड़ा कदम: शवों पर नहीं की जा सकेगी राजनीति, चलेगा कानून का डंडा
इस एक्ट में सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है.

प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) शवों के साथ धरना प्रदर्शन (Demonstration with dead bodies) करने वाले आंदोलनकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है. राज्य सरकार ऐसे प्रदर्शनों को गैरकानूनी घोषित (Illegal) करेगी.

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जयपुर. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) शवों के साथ धरना प्रदर्शन (Demonstration with dead bodies) करने वाले आंदोलनकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है. राज्य सरकार ऐसे प्रदर्शनों को गैरकानूनी घोषित (Illegal) करेगी. इसके लिए सरकार नया कानून (New law) लाने जा रही है. राज्य के विधि विभाग (Law Department) ने इस कानून का ड्राफ्ट भी तैयार (Draft ready) कर लिया है.

सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान
राजस्थान प्रोहिबिशन फ्रॉम डेमोंसट्रेशन विद डेड बॉडी-2019 और राजस्थान प्रीवेंशन ऑफ डिस्प्रप्शन ऑफ पब्लिक मूवमेंट ओर्डिनेंश एक्ट ला रही है. इस एक्ट में सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है. सरकार आनंदपाल एनकाउंटर के दौरान हुए प्रदर्शनों जैसी घटनाओं को रोकना चाहती है. राज्य में शव को लेकर आंदोलन करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में सरकार इस तरह के मामलों को गैरकानूनी घोषित करेगी.

मानवाधिकार आयोग ने दिया था सुझाव

लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए शव के साथ धरना प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाते हैं. राज्य के गृह सचिव की अध्यक्षता में कानून का ड्राफ्ट बनाने से पहले मंथन हुआ था. पिछले दिनों मानवाधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रकाश टाटिया ने शवों पर राजनीति को लेकर कानून बनाने के लिए राज्य सरकार को सुझाव दिया था. हालांकि उस सुझाव को दिए हुए वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अब इस पर अमल करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है.

शव के भी अपने अधिकार होते हैं
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के कई हिस्सों में समय-समय पर शव को लेकर राजनीति और आंदोलन होते रहे हैं. इसके कारण शवों की दुर्गति होती है. कानून और व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती है. मानव अधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रकाश टाटिया ने यह तर्क देकर शवों पर राजनीति बंद करने का सुझाव दिया था कि शव के भी अपने अधिकार होते हैं. उसका सम्मानजनक निस्तारण एक बुनियादी अधिकार है. सरकार अब इसी कानूनी पहलू को लेकर शव पर राजनीति रोकने के लिए यह कदम उठाने जा रही है. इसके प्रस्तावित कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है.पंचायत चुनाव: हट सकता है 2 से अधिक संतान होने पर चुनाव नहीं लड़ पाने का नियम

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First published: December 10, 2019, 11:13 AM IST
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