Rajasthan: कृषि बिलों पर NDA का एक और घटक दल नाराज, अकाली दल के बाद RLP भी मोदी सरकार से खफा

आरएलपी इस बिल को लेकर किसानों में अपनी साख किसी 
भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती.
आरएलपी इस बिल को लेकर किसानों में अपनी साख किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती.

नये कृषि बिलों (New agricultural bill) को लेकर एनडीए का एक और घटक दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) भी मोदी सरकार से खफा नजर आ रहा है. पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) कहा कि वे इस मसले पर किसानों के साथ खड़े हैं.

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जयपुर. नए कृषि बिल (New agricultural bill) पर अकाली दल के एनडीए से नाता तोड़ने के बाद उसका एक और घटक दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (National democratic party) भी इस बिल को लेकर खफा है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने चेतावनी दी कि वह इस बिल के मुद्दे पर किसानों के साथ खड़ी होगी. आरएलपी के संयोजक नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने कहा कि पार्टी की कोर कमेटी इस बिल की आपत्तियों पर विचार कर पार्टी रणनीति का फैसला करेगी. आरएलपी के एनडीए का हिस्सा रहने या न रहने पर भी पुनर्विचार कर सकती है.

आरएलपी की आपत्ति ये है कि बिल को संसद में पेश करने से पहले सहयोगी दलों को विश्वास में नहीं लिया गया. बेनीवाल ने कहा कि आरएलपी की आपत्ति बिल के दो प्रावधान को लेकर है. पहला तो ये कि मंडियों से बाहर खरीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य की शर्त शामिल नहीं है. दूसरी आपत्ति ये कि निजी कंपनियों की किसान से खरीद में थर्ड पार्टी की भूमिका. बेनीवाल ने कहा कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर इन आपत्तियों को बताएंगे. उसके बाद फैसला करेंगे. बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी की मांग है कि निजी कंपनियों की खरीद फरोख्त में किसानों की सुरक्षा का भरोसा हो. वे शोषण के शिकार ना बनें.

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पार्टी का सबसे बड़ा वोट बैंक ही किसान है
बेनीवाल ने कहा कि जिस दिन संसद में बिल पेश हुए तब वे वहां मौजूद नहीं थे. इसलिए उस समय न तो उनका इस बिल को समर्थन रहा न ही विरोध. आरएलपी राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के बाद बड़ी राजनीतिक ताकत है. आरएलपी ने अपनी पहचान किसानों की पार्टी के रूप में बनाई है. बेनीवाल खुद को किसान नेता और उनके हित चिंतक के रूप में दिखाते रहे हैं. आरएलपी का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिम राजस्थान में है. वहां पार्टी का सबसे बड़ा वोट बैंक ही किसान है.

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किसानों में अपनी साख किसी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती आरएलपी
ऐसे में आरएलपी इस बिल को लेकर किसानों में अपनी साख किसी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती. राजस्थान में फिलहाल इस पार्टी से एक सांसद और तीन विधायक हैं. हनुमान बेनीवाल की पहली कोशिश ये है कि किसी तरह कृषि बिल पर साख बचाने वाला कोई वादा पीएम से हासिल करे या फिर एनडीए से अलग होकर अपनी साख बचाए. बेनीवाल दूसरे विकल्प पर विचार तो कर रहे हैं लेकिन उसे तब चुनेंगे जब ये लगेगा कि ये बिल उनकी राजनीतिक जमीन खींच सकता है. राजस्थान में लोकसभा चुनाव में बीजेपी-आरएलपी गठबंधन ने सभी 25 सीटें जीती थी. बीजेपी को आरएलपी के वोट बैंक से जाट बाहुल्य इलाकों में खासा फायदा हुआ था.
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