Article 370: आई चेहरों पर रौनक, कश्मीरी पंडितों को अब घर वापसी का इंतजार

जम्मू-कश्मीर में धारा 370 अब इतिहास बन गई है. पूरा देश इसके हटने का जश्न मना रहा है. अब उन कश्मीरी पंडितों की उम्मीदों को भी पंख लगे हुए हैं, जिन्हें 3 दशक पहले दहशतगर्दों ने अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया था.

Balkrishna Sharma | News18 Rajasthan
Updated: August 8, 2019, 4:20 PM IST
Article 370: आई चेहरों पर रौनक, कश्मीरी पंडितों को अब घर वापसी का इंतजार
जयपुर में रह रहे कश्मीरी पंंडित विमल कौल की पत्नी पूर्णिमा एवं उनका बेटा विकेश। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
Balkrishna Sharma | News18 Rajasthan
Updated: August 8, 2019, 4:20 PM IST
जम्मू-कश्मीर में धारा 370 अब इतिहास बन गई है. पूरा देश इसके हटने का जश्न मना रहा है. अब उन कश्मीरी पंडितों की उम्मीदों को भी पंख लगे हुए हैं, जिन्हें 3 दशक पहले दहशतगर्दों ने अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया था. कश्मीरी पंडित अपने घर वापसी के सपने को साकार होता देखने लगे लगे हैं, लेकिन कई सवाल उनके जेहन में हैं.

जयपुर में रहते हैं करीब 250 कश्मीरी परिवार
घाटी में हत्या, लूट और बलात्कार के दंश को झेलते हुए कश्मीरी पंडितों के 4 लाख परिवारों ने 1990 में घाटी छोड़ी थी. इनमें से करीब 400 परिवार राजस्थान पहुंचे थे. राजस्थान में जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, कोटा और सवाई माधोपुर में उन्होंने अपना बसेरा बनाया. वर्तमान में कश्मीरी पंडितों के करीब 250 परिवार जयपुर में रहते हैं. पूर्व सरकारों के ढुलमुल रवैये से इनकी घाटी में अपने घर वापसी की उम्मीदें लगभग दम तोड़ चुकी थीं, लेकिन मोदी सरकार ने धारा 370 हटाकर इनकी उम्मीदों को फिर से आसमान पर पहुंचा दिया है.

कश्मीर की खूबसूरती को किस्से कहानियों में सुनकर महसूस किया है

इन परिवारों के बच्चों ने कश्मीर की खूबसूरती को अपने माता-पिता से किस्से कहानियों में सुनकर महसूस किया है या फिर तस्वीरों में देखा है. इन परिवारों के बच्चे धारा 370 की जटिलता को तो नहीं समझते, लेकिन घर के बड़े लोगों के चेहरे पर लौटी रौनक देखकर लगता है कि कुछ अच्छा हुआ है. कुछ बड़ा हुआ है. कश्मीर जाने की ललक इनके चेहरों पर भी साफ देखी जा सकती है.

अनंतनाग के दांतर गांव के रहने वाला है कौल परिवार
कश्मीरी विमल कौल करीब 28 साल से जयपुर में रह रहे हैं. अनंतनाग के पास एक छोटे से खूबसूरत गांव दांतर की यादें 370 हटने के साथ ही ताजा हो गईं. जिस गांव को रातों रात छोड़कर पलायन करना पड़ा था, उसी गांव में कौल अब वापस लौटना चाहते हैं. लेकिन उनके जेहन में सवाल हैं कि क्या मोदी सरकार कश्मीर में उनके रहने लायक माहौल बना पाएगी. इनको पता है कि जिस सरकार ने इतना बड़ा फैसला इतनी मुश्तैदी के साथ लिया. उस पर भरोसा करना लाजिमी है. लेकिन शंकाएं तो शंकाएं हैं जाते से जाएगी.
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Kashmiri Pandit Vimal Kaul : कश्मीरी पंडित विमल कौल।
कश्मीरी पंडित विमल कौल। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


गैर मुस्लिम परिवारों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करे
बकौल कौल सरकार सबसे पहले वहां गैर मुस्लिम परिवारों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करे. जम्मू-कश्मीर में रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएं. घाटी के साथ दूर-दराज के इलाकों में शिक्षा का प्रसार हो. क्योंकि अशिक्षित और बेरोजगार मुस्लिम युवा पाकिस्तानी आतंकी आकाओं के लालच में जल्दी फंस जाते हैं. शहरों-कस्बों में नई रिहायशी कॉलोनियां और टाउनशिप बनें. पंडितों के पुस्तैनी घर, खेत और जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए. शहरों में नए बाजार, मॉल और इंडस्ट्रीज विकसित किए जाए ताकि कश्मीर अपने वैभव को फिर से हासिल कर सके.

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First published: August 8, 2019, 3:57 PM IST
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