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आसाराम बोले, ज‍िसने सुप्रीम कोर्ट में फेक मेड‍िकल सर्ट‍िफ‍िकेट लगाया उसको मैं जानता भी नहीं...

सुप्रीम कोर्ट में झूठा मेडिकल प्रमाण-पत्र पेश करने के दर्ज एफआईआर के मामले में गुरुवार को सीजेएम महानगर विक्रम सांखला की कोर्ट में सुनवाई हुई.

सुप्रीम कोर्ट में झूठा मेडिकल प्रमाण-पत्र पेश करने के दर्ज एफआईआर के मामले में गुरुवार को सीजेएम महानगर विक्रम सांखला की कोर्ट में सुनवाई हुई.

Rajasthan News: आसाराम के वकील ने कहा कि रातानाडा पुलिस थाना द्वारा पेश चार्जशीट में भी कोई ऐसे साक्ष्य सामने नहीं आए क ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी और उसमें आसाराम की कोई भूमिका नहीं थी.
आसाराम के पैरोकार रवि रॉय वगे ने आसाराम को जमानत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पेश की थी

जीवन की आखिरी सांस तक जेल की सजा काट रहे आसाराम के खिलाफ अपने पैरोकार के जरिए सुप्रीम कोर्ट में झूठा मेडिकल प्रमाण-पत्र पेश करने के दर्ज एफआईआर के मामले में गुरुवार को सीजेएम महानगर विक्रम सांखला की कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान चार्ज बहस के दौरान आसाराम के अधिवक्ता विजय पटेल ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि रवि रॉय नामक व्यक्ति ने जो सुप्रीम कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पेश किए थे, लेकिन आसाराम ने उसे पैरोकार नियुक्ति ही नहीं किया.

उन्होंने कहा कि रातानाडा पुलिस थाना द्वारा पेश चार्जशीट में भी कोई ऐसे साक्ष्य सामने नहीं आए कि आसाराम ने रवि रॉय को पैरोकार नियुक्त किया हो. ना ही तो उसने कभी आसारास से मुलाकात की और ना ही उसने कभी आसाराम से फोन या व्‍हाट्सएप के जरिए बात की. उसने अपने स्व. विवेक से यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी और उसमें आसाराम की कोई भूमिका नहीं थी. पैरोकार रवि रॉय के अधिवक्ता ने क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला बताया. गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान आसाराम के पैरोकार रवि रॉय के अधिवक्ता नीलकमल बोहरा ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि नियमानुसर जिस कोर्ट में कोई फर्जी दस्तावेज पेश किए जाते है, उसी को आरोपी पर एफआईआर करने का अधिकार बनता है. जेल प्रशासन या पुलिस द्वारा उसके मुवक्किल के खिलाफ की गई एफआईआर विधि सम्मत नहीं है.

उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में यदि दस्तावेज पेश किए गए फर्जी है तो सुप्रीम कोर्ट के किसी अधिकारी को ही एफआईआर करवाने का अधिकार बनता है. इसके अलावा उन्होंने बहस करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट वैल्यूबल दस्तावेज की श्रेणी में नहीं आते ऐसे में पुलिस चार्जशीट में उनके ऊपर लगाए गई भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व 468 विधि सम्मत नहीं है. अगली पेशी पर चार्ज सुनाए जाएंगे. आसाराम और उसके पैरोकार के अधिवक्ताओं द्वारा चार्ज बहस पूरी कर ली गई है. कोर्ट ने आगामी तीन नवम्बर की तारीख अगली सुनवाई के लिए मुकर्रर की है. अगली तारीख पर आसाराम और उसके पैरोकार को कोर्ट द्वारा आरोप सुनाए जाएंगे.

यह था मामला
आसाराम के पैरोकार रवि रॉय वगे ने आसाराम को जमानत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पेश की थी, जिसने जोधपुर सेंट्रल जेल की डिस्पेंसरी की कूट रचित मेडिकल सर्टिफिकेट पेश किया गया था, जो सुप्रीम कोर्ट में फर्जी साबित हुआ था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आसाराम के पैरोकार रवि राय वगे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. इसमें आसाराम को भी आरोपी बनाया था. इन धाराओं में किया गया मुकदमा दर्ज क‍िया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के रातानाडा थाने में आसाराम के पैरोकार रवि रॉय वगे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 193, 196, 200, 201, 420, 465, 464, 468, 471, 120 बी में मुकदमा दर्ज किया गया. आसाराम को भी इस मामले में धारा 120 ई में आरोपी बनाया गया है.

साल 2017 का है मामला
आसाराम के पैरोकार और आसाराम के खिलाफ यह मामला साल 2017 में दर्ज किया गया था. यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें अधिकतम 3 से 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है. जेल से वीसी के जरिए आसाराम कोर्ट में पेश हुए. गुरुवार को सुनवाई के दौरान आसाराम जेल से वीसी के जरिए कोर्ट में हाजिर हुए. आसाराम पूरी सुनवाई के दौरान करीब 45 मिनट वीसी के माध्यम से जुड़कर रहे. आसाराम की पेशी की खबर सुनते ही आसाराम के कई समर्थक आसाराम की एक झलक देखने के लिए गुरुवार को सीजेएम महानगर कोर्ट के आसापास मंडराते नजर आए, लेकिन उनको निराशा हाथ लगी.

Tags: Asaram, Jaipur news, Rajasthan news, Supreme Court

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