राजस्थान: गहलोत कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल की कवायद तेज, दिल्ली से जयपुर तक टटोले जा रहे मन

राजस्थान में गहलोत कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल की कवायद तेज हो गई है.

राजस्थान में इस सरगर्मी के पीछे सचिन पायलट का वो बयान है, जिसमें उन्होंने सुलह कमेटी की देरी को लेकर सवाल उठाए थे. सचिन पायलट चाहते हैं कि उनके लोगों को जल्द से जल्द मंत्रिमंडल और राजनीतिक नियुक्तियों में जगह दी जाए.

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जयपुर. अशोक गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल (Gehlot cabinet expansion-reshuffle) की कवायद तेज हो गई है. दिल्ली से जयपुर तक इसे लेकर सुगबुगाहट और चर्चाओं का सिलसिला जारी है. राष्ट्रीय राजधानी से लेकर राजस्थान की राजधानी जयपुर तक पार्टी के वरिष्ठ नेता मन टटोलने में लगे हैं. सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC venugopal) और प्रदेश प्रभारी अजय माकन (Ajay makan) के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है. वहीं, जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) से भी पिछले 2-3 दिन में कई विधायक और मंत्री मिले हैं. जानकार सूत्रों के मुताबिक, सीएम मंत्रियों-विधायकों का मन टटोल रहे हैं और फीडबैक ले रहे हैं. सचिन पायलट (sachin pilot) दिल्ली में डेरा डाले हुए है. हाल में आए प्रदेश प्रभारी अजय माकन के बयान के बाद ऐसा माना जा रहा है कि जून के अंत में या जुलाई माह में मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार किया जा सकता है.

आलाकमान जल्द खत्म करना चाहता है मसला 
सचिन पायलट ने हाल ही  में सुलह कमेटी द्वारा की जा रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद राजनीति गर्म है. सचिन पायलट चाहते हैं कि उनके लोगों को जल्द से जल्द मंत्रिमंडल और राजनीतिक नियुक्तियों में जगह दी जाए. आलाकमान भी अब इस मुद्दे को लेकर गंभीर है. ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने के बाद पार्टी की किरकिरी हुई है. अब आलाकमान कोई रिस्क लेना नहीं चाहता है. वहीं पायलट खेमे की ओर से हो रही बार-बार बयानबाजी से भी पार्टी के विपरीत माहौल बन रहा है. जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मसले को जल्द खत्म करने को कहा है. दिल्ली में डेरा जमाए बैठे पायलट की जल्द ही आलाकमान से भी मुलाकात हो सकती है और जल्द ही सुलह का फॉर्मूला भी तय हो सकता है.

डैमेज कंट्रोल की हो रही है कवायद
मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल होने पर विधायकों की नाराजगी बड़े स्तर पर सामने आ सकती है. इसे लेकर पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. दरअसल सचिन पायलट अपने लोगों की मंत्रिमंडल में एंट्री करवाना चाहते हैं. वहीं सियासी संकट के दौरान सरकार का साथ देने वाले कई विधायक भी मंत्री बनने का सपना संजोए हुए हैं. बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को जहां मंत्रिमंडल में जगह मिलने का इंतजार है, तो सरकार का साथ देने वाले कुछ निर्दलीय विधायक भी इस कतार में हैं. जबकि मंत्रिमंडल में खाली पद केवल 9 हैं.

ऐसी स्थितियों में जिसे भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी वही बगावत का रास्ता अख्तियार कर सकता है. इसे लेकर पहले ही मन टटोले जा रहे हैं साथ ही ऐसा फॉर्मूला लाने की भी कवायद हो रही है. जिससे कम से कम डैमेज हो. इस तरह की चर्चाएं हैं कि जो विधायक पहली बार जीतकर आए हैं उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी और इन्हें राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट किया जा सकता है. वहीं वर्तमान मंत्रिमंडल में शामिल नॉन परफॉर्मर कुछ मंत्रियों को भी बाहर कर उनकी जगह नए चेहरे लिए जाएंगे.

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