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Rajasthan: कांग्रेस में 3 साल में 3 मंत्री-विधायकों ने दिया इस्तीफा, लेकिन नहीं हुआ मंजूर, जानें वजह

Rajasthan Samachar: अशोक गहलोत सरकार के इस कार्यकाल में अब तब 3 विधायक और मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश की है.

Rajasthan Samachar: अशोक गहलोत सरकार के इस कार्यकाल में अब तब 3 विधायक और मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश की है.

Jaipur News: राजस्थान (Rajasthan News) में सियासी हलचल तेज है. डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा (Ganesh Ghogra Resign) के इस्तीफे की भी खूब चर्चा हो रही है. हालांकि इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया. मालूम हो कि गहलोत सरकार के इस कार्यकाल में यह तीसरा मौका है जब सत्ता पक्ष के किसी मंत्री-विधायक ने अपना इस्तीफा सौंपा, लेकिन तीनों बार ही इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया.

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जयपुर. डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा के इस्तीफे की देश-प्रदेश में खूब चर्चाएं हैं. एफआईआर में नाम आने के बाद जनता के काम नहीं होने और अधिकारियों द्वारा बात नहीं सुनने का हवाला देते हुए विधायक गणेश घोघरा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पिछले दिनों अपना इस्तीफा भेजा. विधानसभा अध्यक्ष को भी उसकी कॉपी भेजी गई, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी इस्तीफे का अंजाम वही हुआ जिसकी अपेक्षा की जा रही थी. गणेश घोघरा का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ. इस कार्यकाल में यह तीसरा मौका है जब सत्ता पक्ष के किसी मंत्री-विधायक ने अपना इस्तीफा सौंपा,  लेकिन तीनों बार ही इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया.

घोघरा से पहले लालचन्द कटारिया मंत्री पद से और हेमाराम चौधरी विधायक पद से इस्तीफा भेज चुके हैं. लेकिन उनका इस्तीफा भी मंजूर नहीं किया गया था. इन मामलों में भी कांग्रेस ने मान-मनौव्वल के प्रयास किए और आखिर मंत्री-विधायक अपने पद पर बने रहने के लिए राजी हो गए.
कब किसने दिया इस्तीफा?

मंत्री-विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं करने की सरकार और कांग्रेस की अपनी कुछ मजबूरियां हैं. दरअसल सरकार विधानसभा में पार्टी हमेशा ऐसी स्थिति में रही कि एक-एक विधायक उसके लिए जरूरी रहा. कभी पार्टी में ही पाले खिंचे रहे तो कभी राज्यसभा चुनाव जैसी स्थितियों में एक-एक विधायक की अहमियत रही. सबसे पहले तीन साल पहले मंत्री लालचन्द कटारिया ने मंत्री पद छोड़ने की पेशकश की. दरअसल लोकसभा चुनाव में लालचन्द कटारिया के क्षेत्र झोटवाड़ा में कांग्रेस की करीब 1 लाख 14 हजार वोटों से हार हुई जिसके बाद कटारिया की काफी आलोचना हुई.

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आखिरकार कटारिया अपना इस्तीफा देकर उत्तराखण्ड चले गए, लेकिन मुख्यमंत्री ने कटारिया का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. वहीं पिछले साल गुढामालानी विधायक हेमाराम चौधरी ने भी अपने क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने से नाराज होकर विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया था. कई महीनों तक पायलट खेमे के हेमाराम चौधरी इस्तीफे पर अड़े रहे, लेकिन इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया. बाद में हेमाराम चौधरी को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया. इससे पहले साल 2019 में भी हेमाराम चौधरी ने अपना इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार नहीं किया गया था. खास तौर से माननीयों की नाराजगी की वजह ब्यूरोक्रेसी की बेरुखी बताई गई. विधायकों ने अपने इस्तीफे के पीछे चाहे जो वजहें बताई हों लेकिन इन इस्तीफों को दबाव की राजनीति से जोड़कर भी देखा गया. अपनी मांगें मनवाने के लिए माननीयों को इस्तीफे का रास्ता सबसे मुफीद नजर आया और सियासी मजबूरियों के चलते माननीयों के इस्तीफे मंजूर नहीं हो पाए.

Tags: Jaipur news, Politics, Rajasthan news

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