Rajasthan: गहलोत सरकार पर सियासी संकट से धीमी हुई ब्यूरोक्रेसी की चाल, फाइलों का मूवमेंट थमा
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Rajasthan: गहलोत सरकार पर सियासी संकट से धीमी हुई ब्यूरोक्रेसी की चाल, फाइलों का मूवमेंट थमा
फाइलों का मूवमेंट नहीं होने के कारण कुछ बड़े मसले सरकार के स्तर पर पेंडिंग चल रहे हैं.

प्रदेश में राजनीतिक अनिश्चितता की धुंध साफ नहीं होने के कारण ब्यूरोक्रेसी की निर्णय लेने की क्षमता जबर्दस्त तरीके से प्रभावित हो रही है. आलम यह है कि मुख्य सचिव रोजमर्रा के कामकाज के अलावा कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले पा रहे हैं.

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जयपुर. प्रदेश में राजनीतिक अनिश्चितता (Political uncertainty) की धुंध साफ नहीं होने के कारण ब्यूरोक्रेसी की निर्णय लेने की क्षमता जबर्दस्त तरीके से प्रभावित हो रही है. आलम यह है कि मुख्य सचिव रोजमर्रा के कामकाज के अलावा कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले पा रहे हैं. सरकार के निर्देशों के इंतजार में टकटकी लगाये बैठी ब्यूरोक्रेसी चुप्पी (Bureaucracy silence) साधकर बैठी है.

फाइलों का मूवमेंट थमा
राज्य में चल रहे सियासी संकट के कारण ब्यूरोक्रेसी की चाल फिलहाल धीमी चल रही है. फाइलों का मूवमेंट नहीं होने के कारण कुछ बड़े मसले सरकार के स्तर पर पेंडिंग चल रहे हैं. इनमें राज्य की जेलों में सुधार के नवाचार और थर्ड जेंडर को अलग से पहचान-पत्र मुहैया कराने समेत मुख्यमंत्री की बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की गति धीमी चल रही है.

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जनघोषणा-पत्र के बिंदुओं पर थमा काम


राज्य में सियासी संकट का असर यह हो रहा है कि जनघोषणा-पत्र के 503 में से सिर्फ डेढ़ सौ बिंदुओं पर ही काम पूरा हो पा रहा है. शेष बिंदुओं पर काम प्रगति पर चल रहा था लेकिन इस बीच प्रदेश में छाए सियासी संकट के कारण फाइलों का मूवमेंट थम सा गया है. विभागों के मंत्री अपने विभाग के अफसरों के साथ नियमित तौर पर मीटिंग नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि बाड़ेबंदी से बाहर निकलकर जलदाय मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा, अल्पसंख्यक मामलात मंत्री सालेह मोहम्मद और सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने अपने विभाग के अफसरों के साथ मीटिंग जरूर की है.

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सचिवालय में पसरा सन्नाटा, दुविधा में ब्यूरोक्रेसी
गहलोत सरकार फिलहाल बचती नजर आ रही है, लेकिन अफसर इतनी भारी दुविधा में आ गये हैं कि किसकी सुनें और किसकी नहीं. उन्हें डर है कि आज ये सत्ता में हैं और कल वो आ गये तो क्या होगा ? इनकी न सुनें तो मुश्किल, उनकी न सुने तो मुश्किल. राज्य में सत्ता बदलने के साथ ही ब्यूरोक्रेसी को बदलने की पुरानी रवायत रही है. ऊपर से दिशा-निर्देश नहीं मिलने के चलते ब्यूरोक्रेट्स दुविधा की स्थिति में है. आलम यह है कि सियासी संकट के बीच शासन सचिवालय में सन्नाटा पसरा हुआ है.
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