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Rajasthan: ब्यूरोक्रेसी को लेकर असमंजस में अशोक गहलोत सरकार, जानिये क्या है वजह

बार-बार तबादलों से अधिकारी भी परेशान हो चुके हैं. इससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है.
बार-बार तबादलों से अधिकारी भी परेशान हो चुके हैं. इससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है.

ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार नाराजगी अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) के लिये गले की फांस बन गई है. सरकार समझ नहीं पा रही है कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जाये.

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जयपुर. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) अपने 2 साल के कार्यकाल में टॉप टू बॉटम अधिकारियों के कई बार तबादले (Transfer) कर चुकी है. लेकिन फिर भी कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता अधिकारियों से संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे में अब गहलोत सरकार के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि वह ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) को बार-बार बदलकर उनकी नाराजगी मोल ले या फिर कार्यकर्ताओं की शिकायतों को अनसुना करें. सरकार अगर बार-बार तबादले करती है प्रशासन में नाराजगी बढ़ती है और ना करे तो पार्टी कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं होते हैं. क्योंकि बार-बार तबादलों से अब अधिकारी भी आजिज आ चुके हैं. ऐसे में गहलोत सरकार अब इस दुविधा में है कि वह इस समस्या का समाधान कैसे निकाले.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हाल ही में प्रदेश के कोटा संभाग के दौरे पर आए कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन के सामने ब्यूरोक्रेसी की जमकर शिकायतें की है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं का कहना है कि ब्यूरोक्रेसी उन्हें बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं करती है. इसकी वजह से कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे हैं. इससे कार्यकर्ताओं और नेताओं को जनता के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है. 

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सियासी संकट का हुआ असर


दरअसल में प्रदेश में पिछले दिनों छाए सियासी संकट का असर ब्यूरोक्रेसी पर भी साफ नजर आया. धड़ों में बंटी कांग्रेस के नेताओं को संतुष्ट करने के लिये सरकार ने इस वर्ष जमकर अधिकारियों को इधर-उधर किया, लेकिन नेता और कार्यकर्ता संतुष्ट ही नहीं हो रहे हैं. बार-बार तबादलों से अधिकारी भी परेशान हो चुके हैं. इससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है. लिहाजा अफसर भी टाइम पास स्टाइल में काम काज करने लगे हैं. इससे सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियां भी ग्रास रूट पर नहीं पहुंच पा रही है. इससे सरकार खासा चिंतित है.



बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की गति धीमी
हालात यह है कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की गति भी बेहद धीमी चल रही है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धीमी गति से कार्य होने से व्यथित है. हालांकि सीएम खुद इसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. वे 30 दिसंबर को सभी विभागों के एसीएस और सेक्रेटरी के साथ बैठक कर बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लेंगे. दो साल पहले सत्ता संभालते ही सीएम गहलोत ने मंत्रिमंडल की बैठक कर कांग्रेस के जनघोषणा-पत्र को सरकारी दस्तावेज बनाया था.
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