COVID-19 में प्रमोट हुए हजारों छात्रों को बड़ा झटका, गहलोत सरकार ने स्कॉलरशिप पर लगाई रोक

राजस्थान सरकार के फैसले का असर हजारों छात्रों पर पड़ेगा.

राजस्थान सरकार के फैसले का असर हजारों छात्रों पर पड़ेगा.

राजस्थान (Rajasthan) के कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को कोविड काल में प्रमोट करने के बाद अब सरकार ने उनकी स्कॉलरशिप (Scholarship) पर रोक लगा दी है. 

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को कोविड काल में प्रमोट होने के साइड इफेक्ट्स अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं. उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों को मिलने वाली स्कॉलरशिप (Scholarship) इसलिए रोक दी गई है क्योंकि स्टूडेंट्स को प्रमोट किया गया. उच्च शिक्षा विभाग ने पहले तो प्रमोट करने की हिमायत भरी और अब खुद विभाग ने ही आदेश जारी कर इस पर रोक भी लगा दी. यह छात्रवृत्ति राज्य के करीब एक लाख विद्यार्थियों को दी जाती हैं. कोरोना (COVID-19) में जब स्कूल कॉलेज बंद थे, तब पिछले सत्र की परीक्षाएं नहीं कराने की मांग उठी थी. इसके बाद राज्य सरकार ने भी विद्यार्थियों को प्रमोट करने का फैसला लिया, लेकिन यूजीसी और कोर्ट के निर्देशानुसार फाइनल ईयर के अलावा बाकी स्टूडेंट्स को कॉलेजों में प्रमोट कर दिया गया.

अब तक राज्य सरकार का उच्च शिक्षा विभाग ही प्रमोट करने की हिमायत कर रहा था. वहीं अब प्रमोट किए गए छात्रों की छात्रवृत्ति देने से इनकार भी कर रहा है. आदेश की प्रति में साफ लिखा है कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रव्रत्ति योजना के तहत कॉलेज छात्रों को मिलने वाली सालाना पांच हजार रूपए सहायता राशि इस बार नहीं दी जाएगी, क्योंकि सरकार ने इस पर रोक लगा दी है. इस संबंध में कॉलेज आयुक्तालय ने आदेश जारी कर कहा है कि इस साल द्वितीय और अंतिम वर्ष के छात्रों के छात्रवृत्ति के आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे. यह आदेश सामने आते ही छात्रों ने नाराजगी व्यक्त कर दी हैं. कॉलेज शिक्षा द्वारा मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति रोकने के पीछे तर्क दिया गया है कि छात्रों को बिना परीक्षाओं के प्रमोट किया गया है. ऐसे में पूर्व कक्षा में आए प्राप्तांकों के आधार पर इस साल छात्रवृत्ति नहीं दी जाएगी.

सालाना मिलते थे 5 हजार रुपए

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रव्रत्ति योजना के तहत प्रथम, द्वितीय और त्रतीय वर्ष में 60 फीसदी या इससे अधिक अंक लाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस योजना के तहत सालाना पांच हजार रुपए दिए जाते हैं. फिर जब पढ़ाई नहीं हुई है तो ऐसे में किस प्रकार से स्कॉलरशिप का आधार तय किया जाएगा. हालांकि, योजना के तहत प्रथम वर्ष और अंतिम वर्ष के करीब 30 हजार से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी.
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मामले में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि राज्य सरकार की ओर से फिलहाल वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है. सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकेगा.
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