Rajasthan: डूंगरपुर हिंसा से पहले ही आदिवासियों को लेकर सतर्क हो गई थी गहलोत सरकार, फिर क्यों हुआ उपद्रव जानिये

गहलोत सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह को विभाग की पूर्णकालिक जिम्मेदारी दी है.
गहलोत सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह को विभाग की पूर्णकालिक जिम्मेदारी दी है.

प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार डूंगरपुर हिंसा (Dungarpur Violence) से पहले ही आदिवासियों के प्रति संवेदनशील हो गई थी. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और आदिवासी (Tribals) सड़कों पर आ गये.

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जयपुर. आदिवासी इलाकों में बीटीपी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को देखते हुये प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार डूंगरपुर हिंसा (Dungarpur Violence) से पहले ही आदिवासियों को लेकर सतर्क हो गई थी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने इस मामले में संवदेनशीलता बरतते हुये आदिवासी इलाकों के विकास के लिये कदम उठाने शुरू कर दिये थे. राज्य सरकार ने हमेशा से रामभरोसे चलते रहे जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग यानी टीएडी  (Tribal Regional Development Department) में पूर्णकालिक अफसर भी तैनात कर दिए गये थे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और आदिवासी युवा सड़कों पर आ गये.

ऑनलाइन 'फ्री' कोचिंग दी जाएगी
राज्य सरकार ने हाल ही में दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी इलाकों के युवाओं के लिए 'टीएडी सुपर-30' प्रोजेक्ट की सौगात दे दी थी. प्रोजेक्ट के तहत युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन 'फ्री' कोचिंग दी जाएगी. जनजाति के विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग और राजस्थान लोक सेवा आयोग में चयन के लिए कोचिंग कराई जाएगी. टीएडी विभाग अभी तक अतिरिक्त चार्ज के भरोसे ही चलता रहा है. टीएडी विभाग में नियुक्ति ब्यूरोक्रेट्स के लिए यह पोस्ट पनिशमेंट मानी जाती रही है. लेकिन राज्य सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह को विभाग की पूर्णकालिक जिम्मेदारी दी है. पूर्णकालिक अधिकारी लगाने का असर भी नजर आया. पद संभालते ही अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश्वर सिंह ने प्रशासनिक सेवाओं की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए 'टीएडी सुपर-30' प्रोजेक्ट शुरू कर दिया.

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पूरा बजट ही खर्च नहीं हो पाता है


आदिवासियों के विकास के लिये आवंटित विभागीय बजट भी अमूमन पूरा खर्च नहीं हो पाता है. इससे आदिवासियों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता है. इसलिए टीएडी आयुक्त के पद पर अलग से आईएएस अधिकारी को नियुक्त करने की मांग हमेशा उठती रही है. विधानसभा में भी यह मामला उठ चुका है. इसलिए सरकार ने टीएडी आयुक्त के पद पर अलग से अधिकारी नियुक्त किए. 2006 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार उपाध्याय को आयुक्त और 2015 बैच की आईएएस अधिकारी अंजली राजोरिया अतिरिक्त आयुक्त लगाया गया दिया था. लेकिन सरकार के ये कदम उठने तक आदिवासियों में आक्रोश इस कदर भर चुका था कि वे सड़कों पर आ गये.
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