Rajasthan: बनास और चंबल नदी का प्रदूषण कम करेगी गहलोत सरकार, एक्शन प्लान बनाने की तैयारी

चंबल नदी राजस्थान के कई इलाकों से होकर गुजरती है.

चंबल नदी राजस्थान के कई इलाकों से होकर गुजरती है.

Pollution in Banas and Chambal River: राजस्थान की गहलोत सरकार इन दोनों नदियों के जल के प्रदूषण को कम करने का काम करेगी. इसके लिये एक्शन प्लान (Action plan) बनाने के निर्देश दिये गये हैं.

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जयपुर. गहलोत सरकार प्रदेश की दो बड़ी नदियों बनास और चंबल नदी के प्रदूषित (Pollution in Banas and Chambal River) जल स्तर को कम करने के लिए अब एक्शन प्लान (Action plan) पर काम करेगी. मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने अधिकारियों को जल्द से जल्द इसके लिये एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं. एनजीटी (NGT) के सख्त निर्देश के बाद सरकार ने एक्शन प्लान बनाने का निर्णय लिया है.

मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने गुरुवार को शासन सचिवालय में उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर इस बारे में जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं. मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने कहा कि चंबल और बनास नदी के प्रदूषित जल को कम करने के प्रयासों में तेजी लाएं. आर्य ने कहा कि देश की 351 प्रदूषित नदियों में से राजस्थान की बनास और चंबल नदी का नाम होना चिंताजनक है. उन्होंने निर्देश दिये कि नदियों के प्रदूषित जल स्तर को जल्द से जल्द कम करने के लिए एक्शन प्लान तैयार किये जाएं.

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कोटा और केशोरायपाटन में प्रदूषित ड्रेन चिन्हित
कोटा में 22 और केशोरायपाटन में 6 अत्याधिक प्रदूषित ड्रेन चिन्हित किये गए हैं. इनकी नियमित रूप से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा जांच की जा रही है. कोटा में 5 सीवेज और केशोरायपाटन में 2 सीवेज का कार्य भी प्रगति पर है. मानसून पूर्व सभी ड्रेनों की सफाई भी सुनिश्चित की गई है. बैठक में स्वायत शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा एवं विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों ने भी वेबीनार के माध्यम से भाग लिया.

अपशिष्ट पदार्थों की मॉनिटरिंग के निर्देश

पर्यावरण सचिव श्रेया गुहा ने बताया कि एक्शन प्लान में औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थो की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं. गुहा ने बताया कि बीसलपुर में बनास नदी के प्रदूषित नदी खण्ड का जैव रासायनिक ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे है जो सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि नेवटा बांध पर बनास नदी के बहाव का बीओडी 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक था जो चिंता का विषय था. लेकिन अब उसका स्तर भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है.
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