पुजारी शंभु शर्मा की मौत पर घिरी गहलोत सरकार, उपचुनाव के बीच सियासी संकट में कांग्रेस

शंभू शर्मा की मौत के मामले ने राजस्थान की गहलोत सरकार के साथ सत्ताधारी कांग्रेस संगठन के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है. इस मुद्दे पर भाजपा ने राजस्थान में गहलोत सरकार को घेर लिया है.

शंभू शर्मा की मौत के मामले ने राजस्थान की गहलोत सरकार के साथ सत्ताधारी कांग्रेस संगठन के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है. इस मुद्दे पर भाजपा ने राजस्थान में गहलोत सरकार को घेर लिया है.

शंभू शर्मा की मौत के मामले ने राजस्थान की गहलोत सरकार के साथ सत्ताधारी कांग्रेस संगठन के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है. इस मुद्दे पर भाजपा ने राजस्थान में गहलोत सरकार को घेर लिया है. शव को लेकर आंदोलन कर रही बीजेपी की राज्य में मंदिर माफी की जमीनों से अतिक्रमण हटाने और पुजारियों की सुरक्षा की मांग कर रही है.

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जयपुर. पुजारी शंभू शर्मा (Shambhu Sharma) की मौत के मामले ने राजस्थान (Rajasthan) की गहलोत सरकार (Gehlot government) के साथ सत्ताधारी कांग्रेस संगठन के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है. इस मुद्दे पर भाजपा ने राजस्थान में गहलोत सरकार को घेर लिया है. शव को लेकर आंदोलन कर रही बीजेपी की राज्य में मंदिर माफी की जमीनों से अतिक्रमण हटाने और पुजारियों की सुरक्षा की मांग कर रही है. महुआ में पुलिस लाठीचार्ज में एक व्यक्ति की मौत का आरोप भी उसके परिजनों ने लगाया है, हालांकि पुलिस इससे इंकार कर रही है. गंगापुर में एक पुजारी को भूमाफियाओं के गोली मारने की घटना से आंदोलन ने और तूल पकड लिया. सिर्फ बीजेपी नहीं विप्र फाउंडेशन समेत कई ब्राह्मण संगठनों के इस आंदोलन में कूदने से राजस्थान की कांग्रेस सरकार की चिंता बढऩे लगी है.

दरअसल, ये मसला कांग्रेस के गले की फांस इसलिए बन रहा है क्योंकि राजस्थान में जिन तीन विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं वहां विप्र वोटरों का प्रभाव है. विधानसभा क्षेत्र राजसमंद, सहाड़ा औऱ सुजानगढ़ में ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. राजस्थान में रियासतकाल से ही मंदिरों के नाम जमीन से लेकर संपत्ति दान की परंपरा रही. ये जमीन भगवान यानि जिस देवता का मंदिर है उसके नाम रहती है. इसे मूर्ति या मंदिर माफी की जमीन कहते हैं. भगवान को नाबालिग माना गया है इस वजह से नाबिलिग के संरक्षक के नाते इन जमीनों का हक पुजारियों के पास होता है.

मंदिर माफी की इन जमीनों की देखरेख और उपयोग मंदिरों के मंहत और  पुजारी करते आए हैं. जिनसे उनके परिवार की आजिविका चलती है. मंदिरों का सेवा और देखरेख का खर्च निकलता है. पुजारी शंभू शर्मा की जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे बीजेपी से राज्यसभा सासंद किरोड़ीलाल मीणा का दावा है कि राज्य में 30 हजार बीघा मंदिर माफी की जमीनों में से 18 हजार बीघा पर भूमाफियाओं का कब्जा है. मीणा कहते हैं कि ये आंदोलन सिर्फ पुजारी शंभु शर्मा की मौत पर इंसाफ का नहीं है. सरकार से मांग है कि मंदिर माफी की जमीनों से अतिक्रमण हटाने के लिए कानून बनाए. तय समय में अतिक्रमण हटाए.

बीजेपी नेता लक्ष्मीकांत भारद्धाज का कहना है कि राज्य में मंदिर माफी की जमीनों की सुरक्षा में पुजारियों की जान जा रही है या वे हर दिन भू माफियाओं से जूझ रहे हैं. राज्य सरकार पुजारियों को सुरक्षा दे. भारद्धाज का कहना है कि पिछले ढाई साल में तीन पुजारियों की मौत हो चुकी है और पुजारियों पर हमले की तो गिनती ही नहीं. कांग्रेस नेता और सर्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा का आरोप है कि बीजेपी शंभू शर्मा की मौत पर विवाद को लंबा खींचने के मूड में है, जिससे इस मुद्दे का सियासी फायदा तीनों उप चुनाव में उठाया जा सके.
सहाड़ा में कांग्रेस से ब्राह्मण वर्ग से ही गायत्री त्रिवेदी मैदान में हैं. बीजेपी ने रतनलाल जाट को मैदान में उतारा है.  बीजेपी इस कोशिश में है कि सहाड़ा में ब्राह्मण वोट में सेंधमारी कर सके तो उसकी राहें आसान हो सकती हैं. राजसमंद सीट पर बीजेपी से दीप्ती माहेश्वेरी और कांग्रेस से तनसुख बोहरा मैदान में हैं.  दोनों ही वैश्य समुदाय से हैं. कांग्रेस बीजेपी दोनों की नजर इस सीट पर ब्राह्मण वोट बैंक पर है. ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में है़.  कमोबेश ये ही तस्वीर सुरक्षित सीट सुजानगढ़ की है. कांग्रेस से मनोज मेघवाल और बीजेपी से खेमाराम मेघवाल मैदान में हैं.  इस सीट पर ब्राह्मण मतादाता 25 हजार से अधिक हैं.

किरोड़ी लाल मीणा का दावा है करौली के बुकना गांव में पुजारी को जिंदा जलाने समेत चार पुजारियों की पिछले दो साल में हत्या हो चुकी है. कांग्रेस अब नहीं चाहेगी कि एक और पुजारी की मौत का मसला मंदिर माफी की जमीनों से कब्जे हटाने के आंदोलन में तब्दील हो जाए या पुजारियों की सुरक्षा चुनावी मूद्दा बने जिसका असर तीन सीटों पर उप चुनाव पर हो.
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