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CM अशोक गहलोत ने बचाया वसुंधरा राजे का सरकारी बंगला, आखिर क्या है 'पॉलिटिकल दोस्ती' के मायने?

Jaipur News Today: अशोक गहलोत के एक सियासी दांव ने वसुंधरा राजे का सरकारी बंगला बचा लिया. इसके बाद अब सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

Jaipur News Today: अशोक गहलोत के एक सियासी दांव ने वसुंधरा राजे का सरकारी बंगला बचा लिया. इसके बाद अब सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

Vasundhara Raje Jaipur Bungalow Controversy: राजस्थान (Rajasthan News) की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje News) को अब अपना सरकारी बंगला खाली नहीं करना पड़ेगा. गहलोत सरकार की ओर से हाईकोर्ट में पेश किए गए शपथ पत्र में कहा गया है कि राजे को बंगला सीनियर विधायक के नाते दिया गया है. इसके बाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस से मुक्त कर दिया और बंगले के खिलाफ लगाई गई याचिका को भी खारिज किया. मालूम हो कि वसुंधरा राजे को पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सिविल लाइन में बंगला नंबर-13 अलॉट किया गया था. राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने भी इस आवंटन को गलत माना था. हालांकि, इसके बाद अब सूबे के सियासी गलियारों में एक बार फिर गहलोत (Ashok Gehlot)-राजे की 'दोस्ती' की चर्चा फिर से शुरू हो गई है.

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जयपुर. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जयपुर के सिविल लाइन में स्थित बंगला नंबर-13 को अब खाली नहीं करना पड़ेगा. सीएम अशोक गहलोत की वजह से उनका सरकारी आवास बच गया. मालूम हो कि पहले हाईकोर्ट ने बंगला आवंटन की प्रक्रिया को गलत माना था. इसके बाद गहलोत सरकार की ओर से पेश एक शपथ पत्र में कहा गया कि वसुंधरा राजे सीनियर विधायक हैं. इस नाते उन्हें बंगला दिया गया है. आवंटन की प्रक्रिया गलत नहीं है. इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार के इस शपथ पत्र को स्वीकार करते हुए वसुंधरा राजे को बड़ी राहत दे दी. गौरतलब हो कि राजस्थान के कई नेता ऐसा आरोप लगाते आए गैं कि राजे-गहलोत भले की अल- पार्टी से हों, लेकिन दोनों के बीच अच्छी दोस्ती रही है. सूत्र बताते हैं कि सचिन पालट के बगवात के दौरान भी वसुंधरा राजे ने अहम भूमिका निभाई थी.

मालूम हो कि पिछले सरकार में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले मुख्यमंत्रियों को विशेष सुविधाएं देने का प्रावधान था. इसके तहत उन्हें बंगला, गाड़ी सहित कई सुविधाएं मिलती थी. इसे ही हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया था.

हाईकोर्ट में पेश की गई थी याचिका

हाईकोर्ट में पेश की गई याचिका में कहा गया था कि वसुंधरा राजे को पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सिविल लाइन में बंगला नंबर-13 अलॉट किया गया था. राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इस आवंटन को गलत माना था. सुप्रीम कोर्ट की ओर से विशेष सुविधाएं देने का प्रोविजन खारिज करने के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट में अपना तर्क रखा था. उन्होंने कहा था कि प्रोविजन खारिज होने के बाद भी वसुंधरा राजे से बंगला खाली नहीं कराया गया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया से बंगला खाली करवा लिया गया है. इसके बाद जुलाई 2020 में राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी कर दिया था.

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इसके बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि वसुंधरा राजे को पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते नहीं ,बल्कि सीनियर विधायक होने के नाते बंगला आवंटित किया गया है. इसके बाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस से मुक्त कर दिया. बंगले के खिलाफ लगाई गई याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया

Tags: Ashok gehlot, Jaipur news, Rajasthan news, Vasundhara raje

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