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राज्यपाल की जिस जीवनी का गहलोत ने विमोचन किया, उसमें BJP ज्वॉइन करने की अपील

बायोग्राफी के पेज नंबर 116 पर भाजपा से जुड़ने और उसे ज्वॉइन करने की अपील है.

Governor's biography in controversy : बिना ऑर्डर के ही कुलपतियों की कार में मिश्र की बायोग्राफी की 19 किताबें रख दी गईं और प्रति किताब 3599 रुपये के हिसाब से 19 किताबों के लिए 68,381 का बिल थमा दिया गया.

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    जयपुर. राज्यपाल कलराज मिश्र की जीवनी पर आधारित किताब 'कलराज मिश्र : निमित्त मात्र हूं मैं' विमोचन के बाद ही सुर्खियों में आ गई है. हालांकि ये चर्चाएं नकारात्मक ज्यादा हैं. राज्यपाल की जिस किताब के लिए मुख्यमंत्री अपने सियासी क्वॉरंटाइन से बाहर आए, उस बायोग्राफी के पेज नंबर 116 पर भाजपा से जुड़ने और उसे ज्वॉइन करने की अपील है. साथ में फोटो पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का है. दूसरी ओर राजभवन ने व्यावसायिक गतिविधियों में कोई भूमिका होने से इनकार किया है.

    18 लाख 46 हजार 287 रुपये की किताबें बिना ऑर्डर ही दे दीं

    बायोग्राफी के विवाद में आने की दूसरी वजह विमोचन के बाद राज्य के कुलपतियों को जबरन किताब थमाना है. बिना ऑर्डर के ही कुलपतियों की कार में 19 किताबें रख दी गईं और प्रति किताब 3599 रुपये के हिसाब से 19 किताबों के लिए 68,381 का बिल थमा दिया गया. यानी 27 कुलपतियों को प्रकाशक व बायोग्राफी के लेखक डॉ डीके टकनेत ने 18 लाख 46 हजार 287 रुपये की किताबें बिना ऑर्डर ही दे दीं.

    बायोग्राफी में बीजेपी ज्वॉइन करने की अपील

    दिलचस्प तथ्य यह रहा कि जिस किसाब के विमोचन के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला आए, उस बायोग्राफी के पेज 116 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी से जुड़ने और इसे ज्वॉइन करने की अपील की गई है.

    जीवनी में जीएसटी की भी विशेषता

    इस पुस्तक में जीएसटी की विशेषता भी बताई गई है, जबकि कांग्रेस की ओर से जीएसटी का विरोध किया जाता रहा है. मुख्यमंत्री ने जिस पुस्तक का विमोचन किया उसके पेज नंबर 17 पर आरएसएस के केशव बलराम हेडगेवार, गोलवलकर और रज्जू भैया के बारे में भी जिक्र है.

    इच्छा न हो तो वापस कर दें किताब

    कुलपतियों को 19—19 किताबें थमाने पर विवाद हुआ तो प्रकाशक की ओर से सफाई आई कि जिसकी इच्छा न हो वह पुस्तक वापस भी कर सकता है. डॉ डीके टकनेत ने दावा किया कि 7-8 कुलपतियों ने खुद उनसे किताब लेने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद ही कुलपतियों को किताबें दी गईं.

    विपणन से राजभवन का कोई संबंध नहीं

    अब इस मामले में राजभवन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किताब की व्यावसायिक गतिविधियों में उसकी कोई भूमिका नहीं है. मुख्य रूप से प्रकाशक आईआईएमई, शोध संस्थान और खरीदने वाले के बीच ही इस बारे में कोई बातचीत हुई है. प्रकाशक ने पुस्तक प्रकाशित कर राजभवन में उसके लोकार्पण की अनुमति मांगी थी, जो उन्हें दी गई.

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