Rajasthan: सफल रही गहलोत की नई आबकारी नीति, घट गये जाम छलकाने वाले, शराब की बिक्री में आई जबर्दस्त गिरावट
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Rajasthan: सफल रही गहलोत की नई आबकारी नीति, घट गये जाम छलकाने वाले, शराब की बिक्री में आई जबर्दस्त गिरावट
राज्य में 8 फरवरी 2020 को नई आबकारी नीति का ऐलान किया गया था.(सांकेतिक तस्वीर)

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) की नई आबकारी नीति (New excise policy) प्रदेश में काफी सफल रही है. इसके जबर्दस्त सकारात्मक परिणाम (Positive result) सामने आये हैं.

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जयपुर. राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) की ओर से लागू की गई नई आबकारी नीति (New excise policy) के एक साल बाद उसके सकारात्मक परिणाम (Positive result) सामने आए हैं. प्रदेश में शराब के उपभोग में कमी लाने की सरकार की नई नीति को काफी हद तक सफल रही है. इससे शराब की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

वित्त एवं आबकारी विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार राजस्थान स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 2019-20 की बिक्री गत वर्ष के 46 लाख केस (बोतल) आईएमएफल के मुकाबले इस साल घटकर 29 लाख रह गई है. इसी तरह बीयर की बिक्री 149 लाख केस से घटकर 66 लाख केस रह गई. 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2019 की तुलना में IMFL की बिक्री 37 फीसदी घटी है वहीं बीयर की बिक्री में 56 फीसदी की कमी आई है. आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में शराब के उपभोग में कमी आई है. शराब पीने वालों की संख्या घट रही है. हालांकि इसके पीछे शराब पर लगाया सरचार्ज के साथ ही कोरोना भी एक बड़ी वजह रही है.

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सरकार ने शराब पर लगाया था सरचार्ज
गहलोत सरकार ने शराब का उपभोग कम करने एवं राजस्व बढ़ाने की मंशा से इस वर्ष 2 जून में IMFL, बीयर, RML और देसी शराब पर 1.50 रुपए से 30 रुपए प्रति बोतल तक सरचार्ज लगाया था. सरकार के टैक्स बढ़ाने के बाद शराब की बिक्री में तेज गिरावट दर्ज की गई है. राज्य सरकार ने इस वर्ष 29 अप्रैल को भारत निर्मित विदेशी शराब (IMFL) पर 35%-45% तक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी का ऐलान किया था. वहीं बीयर पर 45 फीसदी टैक्स बढ़ाया था. दूसरी तरफ कोरोना काल में शराब की दुकानें लंबे समय तक बंद रही थी. इसका असर भी पर पड़ा है. लेकिन ऑवरऑल देखा जाये तो सभी कारणों के शराब की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

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सरकार की मंशा स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो
गहलोत सरकार ने शराब की दुकानों की संख्या सीमित करने करने के साथ राज्य में 8 फरवरी 2020 को नई आबकारी नीति का ऐलान किया था. सरकार ने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाहन करते हुए ठेकों के लिए फीस राशि बढ़ा दी थी. पहले देसी मदिरा के लिए 6640 दुकानों का आवंटन था. उसे घटाकर 5543 दुकान कर दिया गया. शराब से राज्य सरकार को करीब 9 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है. देशी मदिरा समूहों की संख्या घटाकर मुख्यमंत्री गहलोत ने साफ संकेत दिया था कि प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात में पूर्ण शराबबंदी होने के बावजूद भी लगभग हर घर में प्रतिदिन शराब पी जाती है.
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