'गैरों' के साथ-साथ 'अपनों' से भी जूझ रही है प्रदेश की गहलोत सरकार

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रदेश की गहलोत सरकार विपक्षी दल के साथ-साथ अपनों से भी जूझ रही है. सत्ता और संगठन दोनों में ही अपने ही बात-बात पर निशाने साधने से नहीं चूक रहे हैं.

Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: June 19, 2019, 12:34 PM IST
'गैरों' के साथ-साथ 'अपनों' से भी जूझ रही है प्रदेश की गहलोत सरकार
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
Sandeep Rathore
Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: June 19, 2019, 12:34 PM IST
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रदेश की गहलोत सरकार विपक्षी दल के साथ-साथ अपनों से भी जूझ रही है. सत्ता और संगठन दोनों में ही अपने ही बात-बात पर निशाने साधने से नहीं चूक रहे हैं. वहीं प्रदेश में कानून व्यवस्था समेत बिजली-पानी के मुद्दों पर पहले से ही सरकार को निशाने पर ले रखे विपक्ष ने अब उसे सड़क से सदन तक घेरने की रणनीति बनाई है.

करारी हार के बाद अपनों के निशाने पर आई सरकार
दरअसल अप्रेल माह के अंत में अलवर में हुए गैंगरेप केस के बाद कांग्रेस सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई थी. उसके बाद प्रदेश में रेप, गैंगरेप और बजरी माफिया से जुड़े केस काफी संख्या में सामने आए. अलवर केस में देशभर में बदनामी झेल चुके प्रदेश की सरकार इस मामले में लगातार कार्रवाई करती रही और जवाब देती रही. इस बीच लोकसभा चुनाव में पार्टी की हुई करारी हार के बाद सरकार अपनों के निशाने पर आ गई.

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शुरू हुआ बयानबाजी का दौर
लोकसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद संगठन में हार का ठीकरा एक दूसरे के सिर फोड़ने के लिए बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. इस बयानबाजी में सरकार के मुखिया सीएम अशोक गहलोत पर भी निशाने साधे गए. टोडाभीम विधायक पीआर मीणा, पीपल्दा विधायक रामनारायण मीणा, जयपुर लोकसभा क्षेत्र की प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल ने जहां संगठन पर निशाने साधे, वहीं खाद्य मंत्री रमेश मीणा, पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह और उनियारा विधायक एवं पूर्व डीजीपी हरीश मीणा पुलिस और ब्यूरोक्रेट्स पर तल्ख टिप्पणियां कर चर्चा में रहे.

बेअसर रही प्रदेश प्रभारी एडवाइजरी
हरीश मीणा तो टोंक में ट्रैक्टर चालक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आमरण अनशन तक कर चुके हैं. सोशल मीडिया में भी जमकर एक-दूसरे पर निशाने साधे गए. हालांकि इन सबके बीच पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने दो बाद एडवाइजरी जारी कर हार पर बयानबाजी से बचने की सलाह दी, लेकिन फिर भी नेता चूके नहीं.

इन नेताओं ने यूं चलाए सत्ता और संगठन पर तीर

विधायक पीआर मीणा ने सीधे सीएम पर निशाना साधते हुए कहा था कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए अशोक गहलोत जिम्मेदार हैं. मीणा ने कहा कि पीसीसी चीफ सचिन पायलट को सीएम बनाना चाहिए था. पायलट को सीएम बनाते तो हार नहीं होती.

विधायक रामनारायण मीणा ने कहा कि हम नहीं सुधरे तो मोदी सरकार को बर्खास्त कर देंगे. कांग्रेस की लीडरशिप खुद के स्वार्थ छोड़कर संगठन मजबूत करने पर ध्यान दे. मीणा ने दूसरी बार पार्टी के नेताओं पर साधा निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग वार्ड मेंबर तक नहीं जीत सकते, उन्हें पार्टी में बड़े पद दे रखे हैं.

विधायक हरीश मीणा ने भी दो बार अपने ट्वीट के जरिए पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोला. उन्होंने कहा कि राजस्थान में अपराधों में अचानक बढ़ोतरी हुई है. इससे सरकार की बदनामी हो रही है. अब बहाने करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जवाबेदी तय करने की जरुरत है. मीणा ने अलवर के थानागाजी गैंगरेप केस और टोंक के हरभजन मर्डर केस का उदाहरण देते हुए कहा कि इनमें पुलिस की कार्रवाई का स्तर शर्मनाक रहा.

खाद्य मंत्री रमेश मीणा ने ब्यूरोक्रेसी के हावी होने और आम आदमी की सुनवाई नहीं होने का बयान दिया.
पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने भी भरतपुर ​पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ कई दिन तक लगातार मोर्चा खोले रखा.
जयपुर लोकसभा प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि जयपुर में कांग्रेस को कांग्रेस ने ही हराया.

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