राजस्थान: गहलोत V/s पायलट की रस्साकशी से सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारियों की चांदी, कांग्रेस नेता कर रहे इंतजार

कांग्रेस के कुछ विधायक और नेता सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्तियां देने पर दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैं.

कांग्रेस के कुछ विधायक और नेता सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्तियां देने पर दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैं.

Political appointments Issue: राजस्थान में राजनीतिक निुयक्तियों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. माना जा रहा है कि गहलोत बनाम पायलट गुट में चल रही रस्साकशी के कारण राजनीतिक नियुक्तियों में देरी हो रही है. यह बात अलग है कि इसके पीछे कारण दूसरे बताये जा रहे हैं.

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जयपुर. गहलोत बनाम पायलट (Gehlot Vs Pilot) की रस्साकशी के बीच राज्य के सेवानिवृत्त सीनियर आईएएस-आईपीएस अधिकारियों (Retired Senior IAS-IPS Officers) की चांदी हो रही है. एक तरफ विधायकों के लिये मंत्रिमंडल का विस्तार और वरिष्ठ नेताओं तथा कांग्रेस पदाधिकारियों के लिए राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार लंबा हो रहा है. वहीं दूसरी तरफ सरकार ने एक दर्जन से ज्यादा आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को विभिन्न अहम पदों पर नियुक्तियां दे दी हैं.

पिछले साल राजनीतिक संकट और कोरोना के चलते राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हो पाई थीं. इस साल विधानसभा उपचुनाव के तत्काल बाद नियुक्तियां देने की लॉलीपाप दी गई थी. लेकिन अब फिर कोरोना की दूसरी लहर के कहर के चलते एक-दो नियुक्तियां करके बड़े पैमाने पर की जाने वाली नियुक्तियों को फिलहाल टाल दिया गया है. यह अलग बात है कि कोरोनाकाल में ही आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को ऐसी नियुक्तियां खूब मिल रही हैं.

सेवानिवृत्त अधिकारियों पर खूब मेहरबानी

राज्य में दस-बारह आईएएस और आईपीएस एवं अन्य सेवानिवृत अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां दी चुकी है. पिछले सप्ताह ही सेवानिवृत्त आईएएस प्रदीप कुमार बोरड़ को राजस्थान स्टेट पावर फाइनेंस एण्ड फाइनेंशियल सर्विसेज कॉरर्पोरेशन लिमिटेड का स्वतंत्र निदेशक बनाया गया है.
इन आईपीएस अधिकारियों को मिली नियुक्ति

पूर्व में भूपेंद्र सिंह यादव को राजस्थान लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. वरिष्ठ आईपीएस यादव प्रदेश में डीजीपी रह चुके हैं. इसके अलावा आईपीएस हरि प्रसाद शर्मा को राज्य कर्मचारी चयन आयोग का चेयरमैन और आलोक त्रिपाठी को सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया था. वहीं मुख्य सचिव निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य को राजस्थान लोग सेवा आयोग में सदस्य बना दिया. यह बात दीगर है कि संगीता आर्य की नियुक्त निरजंन आर्य के सीएस बनने से पहले कर दी गई थी.

नियुक्तियों के लिए तारीख पर तारीख



राज्य सरकार अगले माह अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लेगी. कांग्रेस विधायकों, पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियां मिलने का इंतजार अभी पूरा नहीं हुआ है. उनको नियुक्तियां देने का मामला लगातार टलता जा रहा है. कांग्रेस के कुछ विधायक और नेता सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्तियां देने पर दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि कुछ न कुछ अड़चन बताकर राजनीतिक नियुक्तियां लगातार टाली जा रही हैं. गहलोत खेमे के विधायकों के मुताबिक पायलट खेमे के विधायकों को कुछ लाभ न देने का नुकसान हमें भी उठाना पड़ रहा है.

लंबे समय से आश्वासन ही मिल रहे हैं

कांग्रेसजनों के मुताबिक पिछले साल भी ऐसा हुआ. अब इस साल जनवरी-फरवरी में नियुक्तियां देने की बात हुई. फिर विधानसभा सत्र के बाद का आश्वासन मिला. फिर उपचुनाव आ गया और अब कोरोना चल रहा है. कांग्रेसजनों का कहना है कि आधा कार्यकाल बीतने को है लेकिन नियुक्तियां नहीं हुई. जो हुई भी हैं तो वे अधिकारियों की हुई हैं. क्या कांग्रेस में योग्य लोगों की कमी है ? पार्टी में डाक्टर, सीए के अलावा हर तरह के पेशेवर लोग हैं. वे संवैधानिक पदों पर बेहतर काम कर सकते हैं.

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