‘हार्सट्रेडिंग’ के खतरे से बचाने असम के प्रत्याशियों को जयपुर की बाड़ेबंदी में कराई ‘हाथी की सवारी’

इनमें ज्यादातर AIDUF के प्रत्याशी शामिल हैं. ये प्रत्याशी चुनाव परिणाम आने तक यहां पर रुकेंगे.

इनमें ज्यादातर AIDUF के प्रत्याशी शामिल हैं. ये प्रत्याशी चुनाव परिणाम आने तक यहां पर रुकेंगे.

Horse trading Risk: जयपुर में इस बार असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन के विधायक प्रत्याशियों को लाया गया है. यहां दो दर्जन विधायकों की बाड़ाबंदी की गई है. चुनाव नतीजे आने पर सत्ता का गुणा-भाग जमाने इनकी खरीद-फरोख्त की आशंका है.

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जयपुर. खरीद-फरोख्द की आशंकाओं के बीच जयपुर में दिल्ली रोड स्थित एक होटल में ठहरे असम में कांग्रेस नेतृत्व गठबंधन के विधायक प्रत्याशियों ने सोमवार को बाड़ेबंदी से कुछ घंटे बाहर निकलकर जयपुर में हाथी गांव का भ्रमण किया. इस दौरान कई विधायक प्रत्याशियों ने हाथी गांव देखने के साथ ही हाथी की सवारी का मजा भी लिया.

इसके साथ ही विधायक प्रत्याशियों ने आमेर क्षेत्र में ऐतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण किया. इस दौरान इन विधायक प्रत्याशियों की व्यवस्थाओं का जिम्मा संभाल रहे आदर्शनगर विधायक उनके साथ रहे. उन्होंने सभी विधायक प्रत्याशियों को घुमाया. आज इन प्रत्याशियों को अजमेर में दरगाह शरीफ ले जाया जा रहा है. उनके साथ सिविल वर्दी में पुलिसकर्मी भी मौजूद हैं. विधायकों के बस में अजमेर ले जाया जा रहा है.

2 दर्जन विधायक प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी

गौरतलब है कि असम में कांग्रेस गठबंधन के करीब 2 दर्जन विधायक प्रत्याशियों की पिछले शुक्रवार से जयपुर के एक होटल में बाड़ेबंदी की गई है. इनमें ज्यादातर AIDUF के प्रत्याशी शामिल हैं. ये प्रत्याशी चुनाव परिणाम आने तक यहां पर रुकेंगे. इनकी राजधानी जयपुर के होटल फेयरमाउंट में बाड़ेबंदी की गई है. यहां उनके रोकने के साथ ही उन्हें घुमाने-फिराने की व्यवस्था भी की गई है.
विधायकों को सुरक्षित रखने के लिये जयपुर भेजती है कांग्रेस

जयपुर में इससे पहले भी कांग्रेस राजस्थान समेत अन्य राज्यों के विधायकों की बाड़ाबंदी कर चुकी है. कांग्रेस के सामने जब-जब सियासी संकट आता है तो वह अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिये जयपुर भेजती है. कांग्रेस में बाड़ाबंदी के लिये जयपुर सबसे मुफीद जगह माने जाने लगी है. वहीं बाड़ाबंदी के लिये फेयरमाउंट होटल में ही ठहराया जाता है. राजस्थान में सियासी संकट के समय गहलोत समर्थक विधायकों की जयपुर के बाद में पश्चिमी राजस्थान में जैसलमेर में भी लंबे समय तक बाड़ाबंदी की गई थी.
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