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Rajasthan: भ्रष्टाचार पर कांग्रेस MLA ने ही गहलोत सरकार को सदन में घेरा, स्पीकर ने जताई आपत्ति

विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने कहा कि जिस कोटा संभाग से वे खुद और यूडीएची मंत्री आते हैं वहां बीते 7 महीनों में भ्रष्टाचार के 32 केस सामने आए हैं.

विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने कहा कि जिस कोटा संभाग से वे खुद और यूडीएची मंत्री आते हैं वहां बीते 7 महीनों में भ्रष्टाचार के 32 केस सामने आए हैं.

Assembly Budget session: कांग्रेस विधायक भरतसिंह कुंदनपुर ने सदन में अपनी ही गहलोत सरकार से पूछा कि वह भ्रष्टाचार के ट्रैक रिकॉर्ड वाले अधिकारी (Corrupt officer) को ही एसपी, कलक्टर और आईजी जैसे पदों पर क्यों लगाती है ?

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जयपुर. भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ जीरो टोलरेंस को लेकर कांग्रेस विधायक भरत सिंह कुंदनपुर (Congress MLA Bharat Singh Kundanpur) ने अपनी ही पार्टी की अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot government) की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं. भरत सिंह ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के मामले को लेकर सवाल उठाया. सिंह ने कहा कि कोरोना काल में अपराधों में तो कमी आई लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में कोई कमी नहीं आई है.

उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार की ऐसी क्या मजबूरी होती है कि वह भ्रष्टाचार के ट्रैक रिकॉर्ड वाले अधिकारी को ही एसपी, कलक्टर और आईजी जैसे पदों पर लगा देती है. फिर भ्रष्टाचार के केस में पकड़े जाने पर उन्हें जेल में बंद करना पड़ता है. हालांकि स्पीकर डॉ. सीपी ने विधायक भरत सिंह के इस सवाल को मूल सवाल से जुड़ा हुआ नहीं मानते हुए मंत्री से इसका जवाब नहीं दिलवाया और अगला सवाल पुकार लिया. स्पीकर ने कहा कि प्रश्नकाल स्पेसिफिक प्रश्न पूछे जाने के लिए है ना कि जनरल पॉलिसी पर डिस्कशन करने के लिए.

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7 महीने में 32 केस
भरत सिंह कुंदनपुर ने कहा कि जिस कोटा संभाग से वे खुद और यूडीएची मंत्री आते हैं वहां बीते 7 महीनों में भ्रष्टाचार के 32 केस सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि बारां, दौसा और उदयपुर में जो अधिकारी नियुक्त किए गए हैं उनके बारे में सदन में मंत्री जानकारी दें. लेकिन स्पीकर ने यह कहते हुए इस पर आपत्ति जता दी कि सवाल मूल रूप से निरीक्षक के बारे में पूछा गया है. सवाल को इतना बड़ा कर देंगे तो फिर वह डिबेट बन जाएगी. स्पीकर ने भरत सिंह से कहा कि अगर निरीक्षक के बारे में कोई सवाल पूछना है तो पूछ सकते हैं. लेकिन भरत सिंह द्वारा सवाल नहीं पूछे जाने पर स्पीकर ने अगला सवाल पुकार लिया.

सिंह के सवाल का धारीवाल ने यह दिया जवाब
उधर भरतसिंह ने पुलिस निरीक्षक से जुड़ा जो मूल सवाल पूछा था उस पर मंत्री शांति धारीवाल ने जवाब देते हुए कहा कि पुलिस निरीक्षक का आचरण एक लोकसेवक की अपेक्षा में अनुपयुक्त एवं अशोभनीय पाये जाने पर उन्हें अनुशासनिक अधिकारी द्वारा राज्य सेवा से बर्खास्त किया गया था. लेकिन अपीलाधिकारी द्वारा उनकी अपील को स्वीकार कर अनुशासनिक अधिकारी के दण्ड को अपास्त किया है. अभी अनुशासनिक अधिकारी द्वारा पुलिस निरीक्षक को राज्य सेवा में वापिस नहीं लिया गया है और राज्यपाल के समक्ष पुनर्विलोकन याचिका प्रस्तुत की गई है जो की विचाराधीन है.
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