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विधानसभा उपचुनाव की बजी रणभेरी, मंडावा और खींवसर सीट के लिए 21 अक्टूबर को होगा मतदान

Prem Meena | News18 Rajasthan
Updated: September 21, 2019, 4:32 PM IST
विधानसभा उपचुनाव की बजी रणभेरी, मंडावा और खींवसर सीट के लिए 21 अक्टूबर को होगा मतदान
मतदान के 3 दिन बाद 24 अक्टूबर होगी मतगणना। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

चुनाव आयोग (Election commission) ने हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र (Maharashtra) के विधानसभा चुनावों (Assembly elections) के साथ ही प्रदेश की दो झुंझुनूं की मंडावा (Mandawa) और नागौर की खींवसर (Kheevansar) विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए भी घोषणा कर दी है. इनमें 21 अक्टूबर को मतदान (Voteing) होगा. मतगणना (Counting of votes) 24 अक्टूबर को होगी.

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जयपुर. प्रदेश में दो विधानसभा क्षेत्रों (Two assembly Seat) में होने वाले उपचुनाव (by-election) की रणभेरी बज उठी है. शनिवार को चुनाव आयोग (Election commission) ने हरियाणा (Haryana) और महाराष्ट्र (Maharashtra) के विधानसभा चुनावों (Assembly elections) के साथ ही प्रदेश की दो झुंझुनूं की मंडावा (Mandawa) और नागौर की खींवसर (Kheevansar) विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए भी घोषणा कर दी है. दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 21 अक्टूबर को मतदान (Voteing) होगा. मतगणना (Counting of votes) 24 अक्टूबर को होगी. चुनाव आयोग के घोषणा के साथ ही मंडावा और खींवसर विधानसभा क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता (Model code of conduct) लागू हो गई है.  चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) तैयारियों  में जुट गई हैं.

दोनों विधायक बन गए हैं सांसद
उपचुनाव के लिए 23 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी होगा. 30 सितंबर तक नामांकन भरे जा सकेंगे. 3 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने की तारीख रहेगी. 21 अक्टूबर को मतदान होगा और उसके तीन दिन बाद 24 अक्टूबर में उपचुनाव का नतीजा घोषित होगा. प्रदेश में गत वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में खींवसर से आरएलपी के हनुमान बेनीवाल विधायक चुने गए थे. वहीं मंडावा से बीजेपी के नरेन्द्र खीचड़ ने चुनाव जीता था. लेकिन उसके बाद इसी वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में ये दोनों विधायक क्रमश: नागौर और झुंझुनूं से चुनाव लड़कर सांसद बन गए;. इसके कारण ये दोनों सीटें खाली हुई थी.

आचार संहिता में ये रहेंगी पाबंदियां

आचार संहिता के बाद इन क्षेत्रों में अब तबादले नहीं हो सकेंगे. बहुत जरूरी हुआ तो सरकार को निर्वाचन आयोग की अनुमति लेनी होगी. चुनाव के दौरान किसी भी प्रकाशन सामग्री में प्रकाशक और मुद्रक का नाम यथा पोस्टर, पैंपलेट आदि पर जरूरी होगा. ऐसा नहीं करने वाले प्रिंटिंग प्रेस मालिकों पर कार्रवाई की जाएगी. इन क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों वाले होर्डिंग्स नहीं लग सकेंगे. वहीं इन क्षेत्रों के लिए सरकारी घोषणाएं भी नहीं की जा सकेंगी.

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First published: September 21, 2019, 4:29 PM IST
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