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विधानसभा उपचुनाव : जीत और हार के बीच प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के जन्मदिन का जश्न

Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: October 24, 2019, 7:16 PM IST
विधानसभा उपचुनाव : जीत और हार के बीच प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के जन्मदिन का जश्न
राजधानी जयपुर में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के जन्मदिन पर जश्न में डूबे कार्यकर्ता। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-election) में झुंझुनूं की मंडावा (Mandawa) विधानसभा सीट की हार का बीजेपी नेताओं के चेहरे पर कोई असर (No any effect) दिखाई नहीं दे रहा है. बीजेपी (BJP) दो उपचुनाव में से एक सीट अपनी सहयोगी आरएलपी (RLP) के जीतने भर से संतुष्ट (Satisfied) नजर आई.

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जयपुर. विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-election) में झुंझुनूं की मंडावा (Mandawa) विधानसभा सीट की हार का बीजेपी नेताओं के चेहरे पर कोई असर (No any effect) दिखाई नहीं दे रहा है. बीजेपी (BJP) दो उपचुनाव में से एक सीट अपनी सहयोगी आरएलपी (RLP) के जीतने भर से संतुष्ट (Satisfied) नजर आई. गुरुवार को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish punia) का जन्मदिन (Birthday) होने के कारण पदाधिकारी और कार्यकर्ता गम का नहीं, बल्कि खुशी का इजहार करते दिखे. मंडावा के प्रभारी राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) ने हार की नैतिक जिम्मेदारी (Moral responsibility) कबूली है. हार और जीत के बीच पूनिया के जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं ने राजधानी जयपुर में जमकर जश्न मनाया.

टिकट का चयन माना जा रहा है हार का बड़ा कारण
मंडावा में बीजेपी की हार का बड़ा कारण टिकट का चयन भी माना जा रहा है. पार्टी ने आनन फानन में कांग्रेसी पृष्ठभूमि की सुशीला सींगड़ा को टिकट दिया. पार्टी आलाकमान ने जब सांसद नरेंद्र खीचड़ के बेटे को टिकट देने से इनकार कर दिया तो बीजेपी ने तत्काल सुशीला को न केवल पार्टी में शामिल किया, बल्कि हाथों हाथ पार्टी का टिकट भी थमा दिया. लेकिन सुशीला जनता के बीच समर्थन नहीं जुटा पाईं. सुशीला प्रचार के शुरुआती दौर में पिछड़ गई और बीजेपी वहां माहौल बना पाने में नाकाम रही.

राठौड़ और पूनिया कर रहे हैं हार के कारणों पर मंथन

नतीजा परंपरागत रूप से कांग्रेस की सीट रही मंडावा एक बार फिर सत्तारूढ पार्टी के खाते में चली गई. बीजेपी यहां अब तक सिर्फ एक बार चुनाव जीत पाई है. मंडावा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहां कांग्रेस के दुर्ग को भेद पाना बीजेपी के लिए कोई आसान काम नहीं है. सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ अब हार के कारणों पर मंथन कर रहे हैं. सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से लेकर अल्पसंख्यक और जाट मतदाताओं के ध्रुवीकरण को शिकस्त की बड़ी वजह मानी जा रही है.

अजेय योद्धा बनकर उभरे बेनीवाल
मंडावा में हार और खींवसर में आरएलपी की जीत से राज्य में बीजेपी व कांग्रेस की सेहत और सियासत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. हां यह जरूर है कि हनुमान बेनीवाल अपने भाई की जीत से खींवसर में अजेय योद्धा बनकर उभरे हैं. वहीं मिर्धा खानदान को फिर तगड़ा झटका लगा है.
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First published: October 24, 2019, 5:22 PM IST
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