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विधानसभा: 33 साल 3 माह 17 दिन बाद हुई राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम के वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा

Sudhir sharma | News18 Rajasthan
Updated: February 14, 2020, 5:47 PM IST
विधानसभा: 33 साल 3 माह 17 दिन बाद हुई राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम के वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा
28 अक्टूबर 1986 को सदन के अंदर सड़क परिवहन समेत दो वार्षिक प्रतिवेदनों को लेकर चर्चा हुई थी.

इस विषय पर चर्चा 33 साल 3 माह 17 दिन बाद हुई है. इससे पहले आठवीं विधानसभा (Assembly) के दौरान सदन में सड़क परिवहन के वार्षिक प्रतिवेदन (Annual report) पर चर्चा हुई थी. उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी (Haridev Joshi) थे और सुजान सिंह यादव (Sujan Singh Yadav) परिवहन राज्यमंत्री थे.

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जयपुर. प्रदेश की विधानसभा (Assembly) में पिछले लगभग तीन दशक से अब तक विभिन्न मामलों को लेकर सदन के अंदर चर्चा (Discussion) होती आई है. इसमें कानून व्यवस्था, अकाल की स्थिति, ओलावृष्टि, पेयजल व्यवस्था और बिजली से जुड़े मुद्दों पर सदन में चर्चा होती है, लेकिन शुक्रवार को सदन के अंदर राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (Rajasthan State Road Transport Corporation) के वार्षिक प्रतिवेदन (Annual report) पर चर्चा हुई.

इससे पहले आठवीं विधानसभा के दौरान हुई थी चर्चा
सदन में इस विषय पर चर्चा 33 साल 3 माह 17 दिन बाद हुई है. इससे पहले आठवीं विधानसभा के दौरान सदन में सड़क परिवहन के वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा हुई थी. उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे और सुजान सिंह यादव परिवहन राज्यमंत्री थे. 28 अक्टूबर 1986 को सदन के अंदर सड़क परिवहन समेत दो वार्षिक प्रतिवेदनों को लेकर चर्चा हुई थी. दूसरा प्रतिवेदन इंदिरा गांधी नहर परियोजना का था. कमला बेनीवाल इस विभाग की मंत्री थी. वहीं भैरोंसिंह शेखावत विपक्ष के नेता थे.

यह है उद्देश्य

असल में वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा कराने के पीछे एक अलग उद्देश्य रहता है. वह यह है कि जब वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा हो रही होती है तो उस विभाग की खामियों को विधायक के सदन में उठा सके और सरकार उन पर काम सके. इसमें भी अंत में संबंधित विभाग का मंत्री सदन के अंदर जवाब देता है. अब जब सदन में बजट किया जाएगा तो राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम के ऊपर कोई चर्चा नहीं होगी.

राजकीय उपक्रमों में सुधार लाने का प्रयास है प्रतिवेदन
असल में सरकार और विधानसभा यह चाहती है रोडवेज समेत अन्य जो राजकीय उपक्रम घाटे में चल रहे हैं उनको उबारने के लिए सदन में चर्चा कराई जानी चाहिए. ताकि विधायकों की ओर से जो सुझाव आए सरकार उन पर अमल करते हुए सुधार के काम करे और घाटे के राजकीय उपक्रमों को उबारे. 

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First published: February 14, 2020, 5:40 PM IST
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