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Rajasthan: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कोर्ट और गर्वनर के बढ़ते हस्तक्षेप पर उठाये गंभीर सवाल

डॉ. जोशी ने कहा कि हम कबड्डी के मैच में प्लेयर को जगह दे रहे हैं तभी तो वह आगे बढ़ रहा है.
डॉ. जोशी ने कहा कि हम कबड्डी के मैच में प्लेयर को जगह दे रहे हैं तभी तो वह आगे बढ़ रहा है.

गुजरात के केवड़िया में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी (Dr. CP Joshi) ने कई बेबाक सुझाव देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. उनके इन सुझावों की गूंज कई दिनों तक रहेगी.

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जयपुर. राजस्थान विधानसभा डॉ. सीपी जोशी (Dr. CP Joshi) सरकार और विधायिका के कामकाज में कोर्ट और गर्वनर (Court and Governor) के बढ़ते हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल उठाए हैं. जोशी ने कहा कि कोर्ट अब सरकार और विधायिका के काम में दखल (Interference) दे रहा है. अब भी कोर्ट का दखल खत्म नहीं किया तो कब करेंगे. जनता सुप्रीम है. नीति बनाने का काम न्यायपालिका करने लग गई तो संसदीय लोकतंत्र का मतलब ही नहीं रह जाएगा.

गुजरात के केवड़िया में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में डॉ. जोशी ने कहा कि हम किसका इंतजार कर रहे हैं. क्यों गवर्नर आज संस्थाओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं. गर्वनर कह रहे कि यह काम करना पड़ेगा. हम कबड्डी के मैच में प्लेयर को जगह दे रहे हैं तभी तो वह आगे बढ़ रहा है. उसे बीच में ही रोक दिया जाए तो वह आगे नहीं बढ़ेगा. न्यायपालिका ही जब सारे निर्णय करने लग जाएगी उस दिन लोकतंत्र से लागों का विश्वास उठ जाएगा.

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स्पीकर की संस्था मजबूत रहनी चाहिये


सीपी जोशी ने इस सम्मेलन में विधानसभाओं को वित्तीय स्वायत्तता देने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई है. जोशी ने कहा कि वित्त आयोग भारत सरकार को लिखे कि संचित निधि में से हर राज्य की विधानसभा के लिए राशि का प्रावधान केंद्र से ही किया जाये. उसे किसी मुख्यमंत्री या सरकार की इच्छा पर मत छोड़िए. सरकारें तो आएंगी जाएंगी. लेकिन स्पीकर की संस्था मजबूत रहनी चाहिये. स्पीकर स्वतंत्र फैसले कर सके इसके लिए वित्तीय स्वायतत्ता जरूरी है.

जोशी के सुझावों की गूंज कई दिनों तक रहेगी
इस सम्मेलन में डॉ. सीपी जोशी ने जिस बेबाक अंदाज में सुझाव दिए हैं उनकी सियासी हलकों में जबर्दस्त चर्चायें हैं. सीपी जोशी ने कोर्ट के बढ़ते दखल और गर्वनर की भूमिका पर सवाल उठाने के साथ साथ विधानसभाओं को सीधे केंद्र से फेडिंग की मांग करके भी नई बहस छेड़ दी है. वहीं निर्वाचित लोगों को ही पार्टी पदाधिकारी बनाने का सुझाव देकर कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति में चल रही बहस को और आगे बढा दिया है. बहरहाल सीपी जोशी के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में दिए गए सुझावों की गूंज कई दिनों तक रहेगी.
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