सावधान ! मुंह पर 'गंदे' मास्क और सिलेंडर पर लगे ह्यूमिडिफायर से भी फैल सकता है ब्लैक फंगस

माइक्रोबायोलोजिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 2-3 हफ्तों तक एक ही मास्क या गंदे मास्क के इस्तेमाल करने से फंगस हो सकता है.

माइक्रोबायोलोजिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 2-3 हफ्तों तक एक ही मास्क या गंदे मास्क के इस्तेमाल करने से फंगस हो सकता है.

Black fungus epidemic: कोरोना संक्रमण के बाद तेजी से फैल रही ब्लैंक फंगस महामारी के फैलने के कई कारण सामने आ रहे हैं. इनमें गंदे मास्क (Dirty masks) और आक्सीजन सिलेंडर पर लगे ह्यूमिडिफायर (Humidifier) को भी इसका कारण माना जा रहा है.

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जयपुर. राज्य सरकार द्वारा ब्लैक फंगस (Black fungus) को महामारी घोषित करने के बाद इसके केस हजार को पार कर गए हैं. कोरोना की दूसरी लहर के बीच ब्लैक और व्हाइट फंगस के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि ये फंगल इंफेक्शन कोविड के उन मरीज़ों को हो रहा है जिन्हें जिन्हें स्टेरॉयड्स दिए गए या फिर डायबिटिक (Diabetic) हैं. अब डाक्टर और विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह पर लगे गंदे मास्क (Dirty masks) , उनका लगातार उपयोग और आक्सीजन सिलेंडर पर लगे ह्यूमिडिफायर (Humidifier) से भी ब्लैक फंगस हो सकता है. इनमें अतिरिक्त सावधानी से फंगस से बचा जा सकता है.

प्रदेश के बड़े शहरों जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर और भीलवाड़ा में कोविड के मरीज कम हो रहे हैं, लेकिन ब्लैक फंगस के रोगियों में इजाफा हो रहा है. राज्य सरकार ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए सभी को मास्क पहनना अनिवार्य किया हुआ है. मास्क न पहनने पर जुर्माने तक का प्रावधान है. विशेषज्ञों के मुताबिक पहनने के साथ ही मास्क को साफ और सेनिटाइज़्ड रखना भी महत्वपूर्ण है. कुछ लोग एक ही मास्क को कई दिनों तक इस्तेमाल करते रहते हैं. ब्लैक फंगल संक्रमण या कहें म्यूकोर-मायकोसिस जो कि एक दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है वह एक म्यूकोर्मिसेट्स के रूप में जाने वाले मोल्ड्स के समूह के कारण होता है. ये संक्रमण अक्सर कमज़ोर इम्युनिटी और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अपना शिकार बनाता है.

एक ही मास्क के लगातार इस्तेमाल से पनपता है फंगस

माइक्रोबायोलोजिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 2-3 हफ्तों तक एक ही मास्क या गंदे मास्क के इस्तेमाल करने से फंगस हो सकता है. क्योंकि बोलने और सांस लेने से मास्क में एरोसोल जमा हो जाते हैं. 25 से 35 डिग्री सेल्सियस गर्मी और नमी के बीच फंगस पनप सकता है. कोविड मरीज के लिए जरूरी है कि उसका मास्क हर आठ-दस घंटे में बदला जाए. लेकिन कई मरीज एक मास्क कई दिनों तक पहने रहते हैं. ऐसे में वह फंगस का इंफेक्शन भी बन सकता है. एंटीसेप्टिक से धोने व धूप में रखने से फंगस मर जाता है.
ह्यूमिडिफायर में फिल्टर पानी का प्रयोग हो

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस का एक और कारण सामने आया है. कोविड मरीजों को दी जाने वाली आक्सीजन थैरेपी के दौरान सिलेंडर पर लगे ह्यूमिडिफायर में साफ पानी का इस्तेमाल नहीं करने और इसे रोजना न बदलने से भी म्यूकर माइकोसिस फैल सकता है. कई बार काम के दबाव के चलते नर्सिंग कर्मी ह्यूमिडिफायर की बोतल का पानी नहीं बदल पाते. एसएमएस मेडिकल कालेज के डॉक्टर्स के मुताबिक ब्लैक फंगस का कारण स्टेराइड, कोविड-19, डायबिटीज और ऑक्सीजन सिलेंडर पर लगे ह्यूमिडिफायर में साफ पानी का इस्तेमाल नहीं करना है. ह्यूमिडिफायर का पानी रोजाना बदलना चाहिए. हो सके तो इसमें फिल्टर पानी का इस्तेमाल करना चाहिए.

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