जयपुरिया अस्पताल में रेजीडेंट डॉक्टर्स के साथ मारपीट, आखिर कब रुकेगा यह सिलसिला ?

राजधानी जयपुर के राजकीय जयपुरिया अस्पताल में रविवार देर रात इमरजेंसी में रेजीडेंट डॉक्टर के साथ हुई मारपीट ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार इन घटनाओं पर लगाम कब लगेगी ?

Sachin Sharma | News18 Rajasthan
Updated: July 15, 2019, 6:22 PM IST
जयपुरिया अस्पताल में रेजीडेंट डॉक्टर्स के साथ मारपीट, आखिर कब रुकेगा यह सिलसिला ?
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
Sachin Sharma | News18 Rajasthan
Updated: July 15, 2019, 6:22 PM IST
राजधानी जयपुर के राजकीय जयपुरिया अस्पताल में रविवार देर रात इमरजेंसी में रेजीडेंट डॉक्टर के साथ हुई मारपीट ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार इन घटनाओं पर लगाम कब लगेगी ? हाल ही में पूरे देश ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में डॉक्टर्स के साथ हुई मारपीट के बाद डॉक्टर्स की हड़ताल का सामना किया था. अस्पतालों में डॉक्टर्स के साथ मारपीट की घटना आए दिन होने के बाद भले ही कानून बना दिए गए हों, लेकिन जब तक उन्हें कड़ाई से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक इन घटनाओं पर प्रभावी रूप से रोक लगाना संभव नहीं है.

आखिरकार गलती किसकी है
जयपुरिया अस्पताल में एक बार फिर मरीज के परिजनों ने रेजीडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट कर इस मामले को तूल दे दिया है कि आखिरकार कमी कहां हैं और गलती किसकी है ? इमरजेंसी में देर रात इलाज के लिए एक साथ मरीज आने पर हर मरीज के परिजन को लगता है कि उसके मरीज को पहले अटेण्ड किया जाए, क्योंकि उसका मरीज अधिक गंभीर है. जयपुरिया अस्पताल में भी कमोबेश यही हुआ.

पर्याप्त टीम का है अभाव

सवाल उठता है कि जब इमरजेंसी में यदि पर्याप्त स्टाफ होता तो क्या यह घटना घटित होती ? हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि उनके यहां स्टाफ पर्याप्त है. प्रदेश की राजधानी में आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध इस अस्पताल में इमरजेंसी में केवल एक मेडिसिन, एक सर्जरी और एक ऑर्थोपेडिक विभाग से रेजीडेंट ही ड्यूटी पर था. ऐसे में जब कोई बड़ी केजुअल्टी होती है या एक साथ कई मरीज इमरजेंसी में पहुंचते हैं तो क्या यह एक-एक चिकित्सक इमरजेंसी को हेण्डल करने के लिए पर्याप्त होते थे. जबकि इस टीम में एनीस्थीसिया, न्यूरोसर्जरी और कार्डियोलॉजी की टीम के चिकित्सक भी होने चाहिए थे. जैसा कि एसएमएस अस्पताल में न्यूरो और कार्डियो की इमरजेंसी टीम अलग से तैनात की गई है.

पुलिस ने बरती तत्परता
जयपुरिया अस्पताल में मारपीट और हंगामे की सूचना मिलते ही बजाज नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस का कहना है कि उसने तत्काल वहां हंगामा कर रहे आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया. यह शायद कुछ हद तक ठीक भी रहा. वरना अक्सर दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर ही रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर चले जाते हैं.
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पर्याप्त संख्या में गार्ड्स भी नहीं हैं
रेजीडेंट डॉक्टर्स का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ की कमी है. इमरजेंसी में पर्याप्त संख्या में गार्ड्स नहीं हैं. ऐसे में मरीज के परिजन मुठ्ठी भर स्टाफ पर हावी हो गए और मारपीट व तोड़फोड़ की घटना घटित हुई.

एक्ट के तहत कभी मुकदम दर्ज किए ही नहीं गए
प्रदेश में वर्ष 2008 में ही मेडिकेयर एक्ट लागू हो चुका है, जिसके अनुरुप चिकित्सकों के साथ मारपीट और चिकित्सालय में तोड़फोड़ करने पर दोषी व्यक्ति को तीन साल की कैद और 50 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन अब तक इस एक्ट के तहत कभी मुकदम दर्ज किए ही नहीं गए हैं. ऐसे में रेजीडेंट डॉक्टर्स हमेशा से ही मरीज और उसके परिजनों के सॉफ्ट टारगेट ही बने रहे हैं.

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First published: July 15, 2019, 6:13 PM IST
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