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पढ़ाई अधूरी छोड़ी, नौकरी से छुट्‌टी नहीं मिली लेकिन फिर भी हासिल किया ओलंपिक टिकट
Jaipur News in Hindi

Mahesh Dadhich | News18 Rajasthan
Updated: February 19, 2020, 2:54 PM IST
पढ़ाई अधूरी छोड़ी, नौकरी से छुट्‌टी नहीं मिली लेकिन फिर भी हासिल किया ओलंपिक टिकट
भावना ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है.

आर्थिक तंगी से जूझते परिवार की इस लड़की ने तमाम संघर्षों के बाद रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए टोक्यो ओलंपिक (Tokyo 2020 Olympics) के लिए क्वालिफाई किया है.

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जयपुर. ये वो खिलाड़ी है जिसके आथिक तंगी के चलते परिवार को कभी दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती थी. ये वो खिलाड़ी है जिसके खेल की तैयारियों लिए पिता ने और खुद ने कर्जा लिया. जब हौसला अफजाई की जरूरत थी तब नौकरी से अफसरों तक ने छुट्टी से भी इनकार कर दिया. इन तमाम संघर्षों के बाद भी अब ये ओलपिंक के सफर को तैयार है. हम बात कर रहे हैं ओलपिंक (Tokyo 2020 Olympics) क्वालिफाई करने वाली एथलीट भावना जाट (bhawna Jat) और उसके संघर्ष की, जो अब भी लगातार जारी है. न थकने न रूकने वाली ये खिलाड़ी अब महिलाओं के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं. जापान की राजधानी टोक्यो में होने वाली ओलंपिक 2020 के लिए अपना टिकट पक्का करने वाली भावना जाट इन दिनों जयपुर के एथलेटिक ट्रेक पर अपना अभ्यास कर रही हैं. राजसमंद के रेलमगरा के छोटे से गांव की रहने वाली भावना ने बीते दिनों रांची में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एक घंटे 29 मिनट और 54 सैंकड में 20 किलोमीटर पैदल चाल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर ओलंपिक में क्वालिफाई किया.

पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी
जयपुर पहुंची भावना जाट ने बताया कि उनके परिवार के लिए शुरूआती दिन आसान नहीं थे. कभी गरीबी से संघर्ष करते हुए परिवार में उन्हें पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी. कभी उनका परिवार खुद का पालन पोषण करने में भी सक्षम नहीं था. लेकिन उन्होंने खेल की ओर जाने की तमन्ना ठानी थी. जिसे उन्होंने कर दिखाया. भावना के परिवार में उनके किसान पिता के पास महज दो बीघा जमीन हैं. अपनी बेटी के खेल के लिए उन्होंने गांव के साहूकार से पांच लाख रुपए का कर्जा लिया. जबकि बीमार भाई के लिए खुद भावना कर्जा लेकर मदद में जुटी हैं. इन तमाम अभावों के बीच भी भावना ने कभी थकने और रूकने का नाम नहीं लिया. यहीं कारण था कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अपना नाम रोशन करने वाली भावना को रेलवे मे टिकट निरीक्षक के पद पर नौकरी मिली.

अभ्यास के लिए भी छुट्टियां नहीं मिली



भावना का अपने खेल में जब राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना तब भले ही उन्हें हर कोई बधाई दे रहा था. लेकिन इससे पहले उन्हें उनके अफसरों का भी साथ नहीं मिल सका था. रेलवे में नौकरी कर रही एथलीट को अपने अभ्यास के लिए भी छुट्टियां नहीं मिली. उन्हें तीन महीने से विदआउट पे रहकर अपनी तैयारियां करनी पड़ रही हैं. ओलिपिक क्वालिफाई करने के बाद भी उन्हें सपोर्ट नहीं मिल सका हैं. उनके कोच गुरूमुख सिंह भावना को कोचिंग पर ध्यान दे रहे हैं.

दुनियां भी उनके संघर्षों का लोहा माने
फिलहाल एशियाई प्रतियोगिता पर उनका ध्यान हैं. लेकिन इसी के साथ उनकी ओलपिंक की तैयारियां भी जारी हैं. जिसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं. रेस वॉक के खेल में तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए गुरूमुख कहते है कि इस खेल के लिए सरकार को फोकस करना चाहिए. क्योंकि राजस्थान में कई खिलाड़ी इस दिशा में मेहनत कर रहे हैं. भावना ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना दम-खम दिखा दिया हैं. लेकिन अब जरूरत हैं कि दुनियां भी उनके संघर्षों का लोहा माने. अपने संघर्ष से पाई सफलता के बाद आज वे बाकी महिला खिलाड़ियों के लिए रोल मॉडल बन गई है. लेकिन अभी उनकी असली इम्तिहान बाकी हैं.

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First published: February 19, 2020, 2:48 PM IST
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