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राजस्थान के अदालतों में अब नहीं सुनाई देगा 'माई लॉर्ड' और 'योर लॉर्डशिप'

राजस्थान के अदालतों में अब नहीं सुनाई देगा 'माई लॉर्ड' और 'योर लॉर्डशिप'

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

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हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ की बैठक ने सर्वसम्मति से इसका प्रस्ताव पास किया गया है. हाईकोर्ट के निर्णय के बाद महिमामंडन करने वाले ये दोनों शब्द अब राज्य की किसी भी अदालत में सुनने को नहीं मिलेंगे.

    देश भर के अदालतों में जज (जस्टिस) को 'माई लॉर्ड' और 'योर लॉर्डशिप' बोलने की परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है. लेकिन अब राजस्थान हाईकोर्ट ने इस परंपरा को खत्म कर दिया है. महिमामंडन करने वाले ये दोनों ही शब्द प्रदेश की किसी भी अदालत में सुनने को नहीं मिलेंगे. हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ की बैठक ने सर्वसम्मति से इसका प्रस्ताव पास किया गया है.

    सार्वजनिक नोटिस जारी
    सोमवार को रजिस्ट्रार जनरल ने इसे लेकर सार्वजनिक नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि संविधान में निहित समानता के जनादेश का सम्मान करने के लिए यह फैसला लिया गया है. इससे पहले भी कई बार इन शब्दों पर आपत्ति जताई जा चुकी है, लेकिन इसे लेकर कभी कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था.

    पहले भी उठ चुकी है आपत्ति
    बता दें कि 'माई लॉर्ड' और 'योर लॉर्डशिप' शब्द की आपत्ति पर वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस एसए बोबड़े की बेंच ने माना इस तरह के शब्दों की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए. अदालत में जज का सम्मानीय तरीके से संबोधन होना ही काफी है. लेकिन बेंच ने पीआईएल (जनहित याचिका) यह कहते हुए खारिज कर दी कि वो अधिवक्ताओं (वकीलों) को यह निर्देश नहीं दे सकती है कि अदालत में किस तरह से संबोधन करना चाहिए. इससे पहले 2009 में मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस चंद्रू ने भी इस बात को माना था, लेकिन कोई निर्णय यहां से भी पारित नहीं हुआ था.

    वकीलों ने फैसले का किया स्वागत
    इस फैसले का वकील जगत ने दिल खोलकर स्वागत किया है. बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चैयरमेन चिरंजीलाल सैनी का कहना है कि यह फैसला स्वागत योग्य है. इससे बार और बेंच में अधिक निकटता आएगी. वहीं दी बार एसोसिएशन ऑफ जयपुर के अध्यक्ष राजेश कर्नल ने कहा कि यह फैसला बेंच की ओर से लिया जाना अपने आप में बड़ी बात है. अगर बेंच इस तरह की सकारात्मक सोच रखती है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है.

    मील का पत्थर साबित होगा यह निर्णय
    जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट प्रशासन का यह निर्णय वास्तव में मील का पत्थर साबित होगा. जो पहल राजस्थान से हुई है, उसे आने वाले समय में अन्य हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी अपना सकता है.

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    Tags: Jaipur news, Jodhpur High Court, Rajasthan high court, Rajasthan news

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