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Rajasthan: भ्रष्टाचार फैलाने वाली 'बड़ी मछलियां' बच रही है अदालती कार्रवाई से, ACB को नहीं मिल रही अभियोजन की स्वीकृति

कार्मिक विभाग के पास मौजूदा समय में 5 RAS समेत बड़े अधिकारियों के 34 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति के प्रस्ताव लंबित पड़े हैं.
कार्मिक विभाग के पास मौजूदा समय में 5 RAS समेत बड़े अधिकारियों के 34 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति के प्रस्ताव लंबित पड़े हैं.

प्रदेश में ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बावजूद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) भ्रष्टाचार में लिप्त बड़ी मछलियों को कटघरे में नहीं खड़ा कर पा रहा है. उसे भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गये अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है.

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जयपुर. गहलोत सरकार ने भ्रष्टाचार (Corruption) को लेकर भले ही जीरो करप्शन नीति अपना रखी है, लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर पा रही है. प्रदेश में भ्रष्टाचार फैलाने वाली बड़ी मछलियों पर एसीबी (ACB) द्वारा शिकंजा कस देने के बावजूद वह तेजी से उसे सिरे तक नहीं पहुंचा पाती है. इसकी वजह है अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलना. इसके चलते कई मामलों में इन अधिकारियों पर बरसों तक कानूनी कार्रवाई शुरू ही नहीं हो पाती है.

सरकार के पास बहुत से मामलों में बरसों से अभियोजन की स्वीकृति अटकी हुई है. चालान पेश नहीं होने के कारण एसीबी इन अफसरों को अदालती कटघरे में खड़ा नहीं कर पा रही है. कार्मिक विभाग के पास मौजूदा समय में 5 RAS समेत बड़े अधिकारियों के 34 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति के प्रस्ताव लंबित पड़े हैं. वहीं बड़े अधिकारियों के अलावा राजपत्रित समेत अन्य कार्मिकों के करीब ढाई सौ मामले कार्मिक विभाग में लंबित चल रहे हैं. इनमें भी बरसों बाद सरकार से मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मिली है.

कार्मिक विभाग का 'ऊपरी दबाव' से इनकार
लंबित मामलों की स्वीकृति नहीं मिलने पर कार्मिक विभाग के अधिकारी किसी 'ऊपरी दबाव' से इनकार करते हैं. कार्मिक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नैसर्गिक न्याय की प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों को सुनवाई का मौका देते हैं. फिर विभाग से टिप्पणी मांगी जाती है. इसके बाद भी संबंधित अधिकारी को एक और सुनवाई का मौका दिया जाता है. इस प्रक्रिया में लंबा समय लग जाता है. इस वजह से मामले की पेंडेंसी बढ़ जाती है. हालांकि कार्मिक विभाग के अधिकारी कुछ भी कहे लेकिन प्रभाव के चलते एसीबी को अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिल पाती है और संबंधित अफसरों के खिलाफ अदालती कार्रवाई नहीं हो पाती है.
इनके खिलाफ बरसों से अटकी है अभियोजन स्वीकृति


राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी नीरज के पवन और निर्मला मीणा के खिलाफ अभी तक अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी है. इसी प्रकार आरएएस निशु कुमार अग्निहोत्री, नरेंद्र कुमार थोरी, दुर्गेश बिस्सा और चंद्रभान सिंह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति अभी तक सरकार से नहीं मिली है. एसीबी ने नए वर्ष में कई बड़ी मछलियों को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा है. एसीबी ने अपने ही विभाग के एडिशनल एसपी भैंरूलाल मीणा और कोटा के तत्कालीन कलक्टर इन्द्र सिंह राव को रिश्वत के मामलों में पकड़ा था.
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