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Big News: रीट के न्यूनतम पासिंग अंकों में 5 से 20 फीसदी की मिलेगी रियायत, 3 साल होगी वैधता

शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि इसकी वैधता अवधि में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है.
शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि इसकी वैधता अवधि में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है.

राज्य सरकार ने रीट (REET) के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों को इसके पासिंग मार्क्स में 5 से 20 फीसदी की रियायत दी है.

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जयपुर. अध्यापक पात्रता परीक्षा (REET) को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है. शिक्षा विभाग ने प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को बड़ी राहत देते हुए इसके न्यूनतम पासिंग अंकों में रियायत (Concession) देने के आदेश जारी कर दिये हैं. रीट की नोडल एजेंसी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Board of Secondary Education) को रखते हुए इसके प्रमाण-पत्र की वैधता तीन साल के लिये बरकरार रखी गई है. आदेश के तहत विभिन्न वर्गों को इसमें 5 से 20 फीसदी तक न्यूनतम अंकों में रियायत दी गई है. शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि आचार संहिता हट चुकी है. जल्द ही राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा की तिथियों का ऐलान कर दिया जाएगा. रीट परीक्षा से प्रदेश में लाखों अभ्यर्थी जुड़े हुये हैं.

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों में न्यूतम अंकों में रियायत के प्रावधान जारी किए गये हैं. इसके तहत सामान्य-अनारक्षित टीएसपी और नॉन टीएसपी के लिए 60 फीसदी, अनुसूचित जनजाति नॉन टीएसपी 55 फीसदी और टीपीएस में 36 फीसदी की बाध्यता लागू होगी. एससी, ओबीसी, एमबीसी और ईडब्ल्यूएस के लिए एमपीएम 55 फीसदी किया गया है. इसी प्रकार सभी श्रेणी में विधवा, परित्यक्ता महिला और भूतपूर्व सैनिकों के लिए 50 फीसदी अंक तय किए गए हैं. दिव्यांग श्रेणी में नियमानुसार आने वाले समस्त अभ्यर्थियों के लिये 40 फीसदी और सहरिया जनजाति के अभ्यर्थियों के लिये 36 फीसदी मिनिमम प्रतिशत होगा.

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पहले प्रमाण-पत्र की वैधता 7 साल की होती थी


शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा के पात्रता प्रमाण-पत्र की वैधता जारी होने की तारीख से 3 साल की अवधि तक रखी गई है. शिक्षा विभाग की ओर से 3 साल की वैधता में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि, साल 2015 से पहले आयोजित होने वाली परीक्षा के प्रमाण-पत्र की वैधता 7 साल होती थी, लेकिन जब 2015 में रीट परीक्षा का आयोजन किया गया तब से प्रमाण-पत्र की वैधता 3 साल की कर दी गई थी.
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