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जन्मदिन विशेष: कांग्रेस के 'संकटमोचक' और 'रणनीतिकार' CM अशोक गहलोत ने कई बार चौंकाया है

जन्मदिन विशेष: कांग्रेस के 'संकटमोचक' और 'रणनीतिकार' CM अशोक गहलोत ने कई बार चौंकाया है

राजस्थान सीएम अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

राजस्थान सीएम अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की छवि कांग्रेस में संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार की मानी जाती है. कांग्रेस में कई मौके ऐसे आए हैं जिनमें हाईकमान ने गहलोत को जिम्मेदारी दी और वो संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार साबित हुए

जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) को कांग्रेस में अनुभवी और कुशल रणनीतिकारों की अगली पंक्ति के नेताओं में गिना जाता है. गहलोत कांग्रेस (Congress) में राजस्थान से लेकर केंद्र की राजनीति तक में बराबर का दखल रखते हैं. अशोक गहलोत की छवि कांग्रेस में संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार की मानी जाती है. कांग्रेस में कई मौके ऐसे आए हैं जिनमें हाईकमान ने गहलोत को जिम्मेदारी दी और वो संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार साबित हुए. गहलोत की गिनती गांधी परिवार के भरोसेमंद नेताओं में की जाती है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आज यानी रविवार को 69वां जन्मदिन है.

गुजरात में कांग्रेस को ला दिया था फाइट में
वर्ष 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हुई बुरी तरह हार के बाद कई नेता मान रहे थे कि अब पार्टी में जनरेशन शिफ्ट के तहत नए नेताओं को आगे लाया जाएगा. लेकिन गहलोत ने विपक्ष में रहने के दौरान भी सक्रियता नहीं छोड़ी. हाईकमान ने गहलोत को पंजाब की जिम्मेदारी दी, फिर गुजरात का प्रभारी महासचिव बनाया. गहलोत ने कुछ ही समय में गुजरात में कांग्रेस को फाइट (मुकाबला) में ला दिया था. राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की लगभग हारी हुई बाजी को गहलोत की रणनीति ने जीत में बदल दिया. उस वक्त गहलोत की रणनीति की देश भर में चर्चा हुई थी, क्योंकि अमित शाह की रणनीति के आगे अहमद पटेल की राज्यसभा सीट पर रणनीतिक रूप से जीत आसान नहीं थी, लेकिन तब भी गहलोत अपनी रणनीति में सफल रहे.

कर्नाटक में कांग्रेस-JDS गठबंधन में निभाई प्रमुख भूमिका
पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत ने प्रभारी रहते अपनी टीम बनाकर जिस तरह आक्रामक चुनाव प्रचार किया उसकी गूंज राष्ट्रीय राजनीति में सुनाई दी. गुजरात में कांग्रेस भले ही सरकार नहीं बना पाई लेकिन उसका प्रदर्शन शानदार रहा था. इसके पीछे गहलोत की रणनीति को कारण माना गया. गुजरात के प्रभारी के बाद अशोक गहलोत को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई. कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार बनाने में भी उस वक्त गहलोत ने ही प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी.


विधानसभा चुनाव से पहले दिए बयान और फिर रणनीति ने चौंकाया 
संगठन महासचिव रहते हुए विधानसभा का चुनाव लड़कर और तीसरी बार मुख्यमंत्री बनकर अशोक गहलोत ने राजनीतिक प्रेक्षकों को चौंका दिया था. संगठन महासचिव रहते हुए विधानसभा चुनाव से पहले 'मैं थां सू दूर नहीं' का बयान देकर गहलोत ने साफ इशारा कर दिया था कि वो कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में भले हों लेकिन राजस्थान में भी दखल रखेंगे. गहलोत के मुख्यमंत्री की दावेदारी वाले इशारों में दिए बयान खूब चर्चा में रहे थे. मसलन एक बार सीएम का चेहरा घोषित नहीं होने के सवाल पर उदयपुर में कहा था, चेहरा कहां खोजते हो, चेहरा आपके सामने है. फिर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान कि 'कौन बनेगा करोड़पति' में पहले थोड़े ही बताया जाता है कि करोड़पति कौन होगा. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कहा, गेम तो अभी शुरू हुआ है. इन घटनाक्रमों के बाद आज जब इन बयानों के राजनीतिक मायने निकाले जाते हैं तो अशोक गहलोत की रणनीति के बारे में साफ पता चलता है.

केंद्रीय राजनीति में भी बराबर सक्रिय हैं
तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने के बाद अशोक गहलोत कांग्रेस की केंद्रीय राजनीति में भी बराबर रूप से सक्रिय हैं. कांग्रेस शासित राज्यों में जब भी कोई सियासी संकट आता है तो गहलोत को ही हाईकमान जिम्मेदारी सौंपता है. पिछले दिनों महाराष्ट्र में सियासी संकट के समय वहां के विधायकों की जयपुर में बाड़ेबंदी गहलोत की देखरेख में हुई थी. इसके बाद मध्य प्रदेश और गुजरात में पार्टी के सामने आए सियासी संकट में भी कांग्रेस विधायकों को बाड़ेबंदी के लिए जयपुर लाया गया. तीनों ही मौकों पर हाईकमान ने अशोक गहलोत को ही जिम्मेदारी सौंपी.

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Tags: Ashok gehlot, Congress, Jaipur news, Rajasthan news

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