जयपुर : वैक्सीनेशन सेंटर पर नेताओं का दंगल, वोट बैंक के चक्कर में भिड़ रहे कांग्रेस-बीजेपी के लोग

वैक्सीन है कम और नेता लेकर आ रहे सिफारिश. हो रही आपस में बहसें. (सांकेतिक तस्वीर)

वैक्सीन है कम और नेता लेकर आ रहे सिफारिश. हो रही आपस में बहसें. (सांकेतिक तस्वीर)

वैक्सीनेशन सेंटर पर भाजपा-कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के भिड़ने की खबरें अक्सर आ रही हैं. दरअसल नेता अपने लोगों को को वैक्सीन लगवाकर इसका राजनीतिक फायदा लेने की कवायद में नजर आ रहे हैं.

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जयपुर. कोरोना काल में वैक्सीन को लेकर शुरू हुई सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. एक ओर जहां वैक्सीन की कमी, किल्लत और बर्बादी जैसे मसलों पर केन्द्र और राज्य सरकार के बीच बयानबाजियों के दौर चल रहे हैं तो दूसरी ओर वैक्सीनेशन सेंटर्स पर भाजपा और कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता जगह-जगह भिड़ते नजर आ रहे हैं.

पर्याप्त संख्या में वैक्सीन उपलब्ध नहीं, इसलिए ऐसे हालात : महेश जोशी

दरअसल संक्रमण से बचाव के लिए हर किसी में पहले वैक्सीन लगवाने की होड़ है. लेकिन वैक्सीन सीमित संख्या में ही उपलब्ध हैं. ऐसे में जगह-जगह राजनीतिक दल के नेताओं में अपने लोगों को पहले वैक्सीन लगवाने की होड़ सी मची है. इस पहले के चक्कर में जगह-जगह भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के बीच आमना-सामना होने की खबरें आ रही हैं और वैक्सीनेशन सेंटर राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो रहे हैं. राजधानी जयपुर में भी बीते कुछ दिनों में कुछ स्थानों पर भाजपा-कांग्रेस के नेता इसे लेकर भिड़े हैं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी का कहना है कि केन्द्र सरकार यदि वैक्सीन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करवाती तो ऐसे हालात न बनते.

कांग्रेस और बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर
कहीं भाजपा तो कहीं कांग्रेस के नेता वैक्सीन में बंदरबांट का आरोप लगा रहे हैं. हर किसी की होड़ अपने लोगों को पहले वैक्सीन लगवाकर उसका राजनीतिक फायदा लेने की है. नेताओं के खास लोगों को पहले वैक्सीन लगने से आमलोगों को वैक्सीनेशन के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है. दोनों पक्ष एक-दूसरे को इसका जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि वैक्सीन भाजपा या कांग्रेस की नहीं है. भाजपा के लोगों को राजनीति करने के बजाय प्रदेश को केन्द्र से ज्यादा वैक्सीन दिलवाने का प्रयास करना चाहिए.

खास के फायदे से आम का नुकसान

वैक्सीन की किल्लत नहीं होती तो इस तरह के हालात भी शायद नहीं होते. जीवन बचाने की जद्दोजहद में हर कोई पहले वैक्सीन हासिल करने का प्रयास कर रहा है. ऐसे में खास लोगों को फायदा मिल रहा है तो आम लोग कई बार ज्यादा जरूरतमंद होने के बावजूद पीछे छूट रहे हैं.

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