BLOG: कोटा सांसद ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष बने, 5 साल पहले गहलोत ने कही थी ये बात...

ओम बिरला ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए लोकसभा सचिवालय में अपनी दावेदारी वाला नोटिस सौंपा तो लोगों को विश्वास नहीं हुआ, मोदी सरकार के बिरला को ये जिम्मेदारी दी जाने वाले फैसले काे चौंकाने वाला बताया गया.

sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 8:52 PM IST
sambrat chaturvedi
sambrat chaturvedi | News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 8:52 PM IST
राजस्थान के कोटा सांसद ओम बिरला राजस्थान मूल के पहले लोकसभा स्पीकर बन गए हैं. लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए उनकी दावेदारी के बाद बुधवार को सदन में उनका निर्विरोध चुनाव हुआ. बिरला को स्पीकर बनाए जाने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ. एक दिन पहले जब उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए लोकसभा सचिवालय में अपनी दावेदारी वाला नोटिस सौंपा तो लोगों को विश्वास नहीं हुआ था, बिरला को ये जिम्मेदारी सौंपना मोदी सरकार का चौंकाने वाला फैसला बताया गया.

दरअसल, लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए ओम बिरला का चयन राजस्थान के लिए चौंकाने वाला है क्योंकि अभी तक प्रदेश से कोई नेता इस पद तक नहीं पहुंच सका. और ऐसे में महज दूसरी बार संसद पहुंचने वाले बिरला को ये जिम्मेदारी देने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का फैसला अप्रत्याशित रहा. सोमवार को बिरला के नाम पर चर्चा के बाद बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने सहमति दी गई और मंगलवार को उन्होंने सचिवालय में अपनी दावेदारी पेश कर दी.

पांच साल पहले गहलोत ने कहा था,  'बिरला अच्छे विधायक हैं, इसलिए उन्हें विधायक ही रखो'

सीएम अशोक गहलोत ने 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कोटा से चुनाव लड़ रहे ओम बिरला को लेकर कहा था कि भाजपा प्रत्याशी ओम बिरला अच्छे विधायक हैं, इसलिए उन्हें विधायक ही रखो. सांसद के रूप में इज्यराजसिंह(तत्कालिन कांग्रेस सांसद) ने बेहतर काम किया है. इसलिए उन्हें फिर से दिल्ली भेजो. हालांकि जनता ने बिरला को चुना. इसके बाद लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले बिरला की ही कुटनीतिक सफलता रही कि कांग्रेस के पूर्व सांसद इज्यराज सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद हुए चुनाव में दूसरी बार फिर बिरला कोटा से सांसद चुने गए.

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ओम-शांति की जोड़ी 

राजस्थान में कोटा सांसद ओम बिरला और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को 'ओम-शांति' की जोड़ी से संबोधित किया जाता है. प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और बीजेपी के इन दिग्गज नेताओं के आपसी संबंध और दोस्ती हमेशा से चर्चा में रही. कुछ साल पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा सत्र के दौरान भी 'ओम-शांति' के नाम से संबोधित करते हुए सदन में बिरला को संबोधित किया था.
बिरला में है सब को साथ लेकर चलने की काबिलियत

बिरला को लेकर 'ओम-शांति' के कथन के मायने सिर्फ शांति धारीवाल या दो नेताओं की दोस्ती से नहीं बल्कि बिरला के व्यक्तित्व से हैं. बिरला हमेशा से दलगत राजनीति से बढ़कर अपने क्षेत्र के विकास से जुड़े रहे हैं. उनके के बारे में कहा जाता है कि वो अपने क्षेत्र के विकास के लिए पार्टी से परे और सब को साथ लेकर चले हैं. उनकी इसी काबिलियत को देखकर अब लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है.

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