Rajasthan News: योगी सरकार के एक फैसले की वजह से हजारों लोगों को मौत के बाद भी नहीं मिल पा रही मुक्ति

हालात यह हो गए हैं कि शमशान घाट के लॉकर अस्थियों से अटे पड़े हैं. यहां तक कि लॉकर्स के ऊपर भी अस्थि कलशों का ढेर लग गया है.

Rajasthan News: उत्तर प्रदेश सरकार के एक फैसले के कारण राजस्थान में कोरोना काल में मारे गये हजारों लोगों की आत्मा को मुक्ति नहीं पा रही है. इसकी वजह है यूपी में बसों की एंट्री पर बैन.

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जयपुर. राजस्‍थान में कोरोना और अन्य कारणों से अपनी जान गंवाने वाले लोगों की अस्थियां गंगा में विसर्जित (Bones immersion) होने का इंतजार कर रही हैं. इन अस्थि कलश की संख्या एक-दो नहीं, बल्कि हजारों में पहुंच गई है. इसका कारण है उतर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government). इन मृत व्यक्तियों की मुक्ति के आड़े आ रही है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार.

योगी सरकार ने राजस्‍थान की रोडवेज बसों की एंट्री यूपी में बैन कर रखी है. इसके चलते बसें हरिद्वार नहीं जा पा रही हैं, जबकि हरिद्वार में अस्थि विसर्जन पर उत्तराखंड सरकार की तरफ से कोई रोक नहीं है. लेकिन, हरिद्वार जाने के लिए यूपी होकर जाना पड़ता है. ऐसे में बसें संचालित नहीं हो पा रही हैं.

श्‍मशान घाट के लॉकर अस्थियों से अटे पड़े हैं
दूसरी ओर पूर्वी राजस्थान के लोग हरिद्वार की जगह यूपी के सौरोंजी में अस्थियां विसर्जित करते हैं, लेकिन वहां भी रोडवेज बसों के जाने की अनुमति नहीं है. दिलचस्‍प है कि निजी वाहनों पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं है, लेकिन इस कोरोना काल में पर्सनल टैक्सी करके अस्थि विसर्जन करना सब के लिए सम्भव नहीं है. हालात ये हो गए हैं कि श्‍मशान घाट के लॉकर अस्थियों से अटे पड़े हैं. यहां तक कि लॉकर्स के ऊपर भी अस्थि कलशों का ढेर लग गया है.

मोक्ष कलश बस के लिए 5 हजार रजिस्ट्रेशन
कोरोना की पहली लहर के दौरान राजस्‍थान में जब लॉकडाउन लगा था और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से बंद था, उस समय गहलोत सरकार ने उत्तराखंड के हरिद्वार और यूपी के सौरोंजी के लिए निशुल्क मोक्ष कलश बसों का संचालन शुरू किया था. उस समय हजारों लोगों ने इस सेवा के जरिए अपनों की अस्थियां गंगा में विसर्जित की थीं. यह योजना अभी भी प्रदेश में लागू है, लेकिन अब उतर प्रदेश सरकार की वजह से बसें हरिद्वार तक संचालित नहीं हो पा रही हैं. अकेले रोडवेज पोर्टल पर ही मोक्ष कलश बस के लिए 5 हजार से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. वहीं, 7 मई के बाद से प्रदेश में अब तक मरने वालों का आंकड़ा कहीं ज्यादा है.

आंकड़ों पर एक नजर
- 7 मई से यूपी में रोडवेज बसों की एंट्री बैन है.
- 7 मई से आज तक कोरोना से प्रदेश में हो 3660 मौतें चुकी है.
- कोरोना के अलावा एसएमएस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 35 मौतें हो जाती है.
- ऐसे में पिछले 40 दिनों में अकेले एसएमएस में 1400 मौतें हुई.
- वहीं राजधानी के अन्य अस्पतालों और अन्य जिलों में करीब 9 हजार मौतें हुई.
- ऐसे में करीब 15 हजार लोगों की अस्थियां विसर्जन का इंतजार कर रही हैं.

मुक्ति के लिए विसर्जन जरूरी
कहते हैं मरने के बाद जिस तरह से मृत शरीर का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होना जरूरी है उसी तरह उसकी अस्थियों का विसर्जन होना भी जरूरी है. ज्योतिषचार्य पंडित परुषोत्तम गौड़ का बताते हैं कि सनातन धर्म में अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व है. वेदों में कहा गया है कि जब गंगा में अस्थि विसर्जन होता है, तभी आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है. गंगा का उद्गम भगवान शिव की जटाओं से हुआ था और गंगा धरती पर अवतरित हुई थी. इसलिए जल, अग्नि और वायु से बने शरीर की राख को गंगा में प्रवाहित करने पर ही उसे शांति मिलती है और आत्मा को मुक्ति मिलती है वरना वह भटकती रहती है.

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