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Rajasthan: तबादलों से आजिज आई प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी को सता यह है बड़ा डर, कहीं सीएम...

Rajasthan: तबादलों से आजिज आई प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी को सता यह है बड़ा डर, कहीं सीएम...

गहलोत सरकार ने अपने 2 वर्ष के शासनकाल के दौरान बड़े पैमाने पर ग्राम स्तर से लेकर सचिवालय तक के अफसर कई बार बदल दिए हैं.

गहलोत सरकार ने अपने 2 वर्ष के शासनकाल के दौरान बड़े पैमाने पर ग्राम स्तर से लेकर सचिवालय तक के अफसर कई बार बदल दिए हैं.

प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) बड़ी दुविधा में है. उसकी इस दुविधा का कारण है बार-बार हो रहे तबादले (Transfers). ब्यूरोक्रेसी के कई अधिकारियों का कहना है के वे बार-बार तबादलों से तंग आ चुके है। इससे कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव (Negative impact) पड़ रहा है.

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जयपुर. प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) बार-बार हो रहे तबादलों (Transfers) से आजिज आ चुकी है. लगातार हो रहे तबादलों से वह दुविधा में है. तबादलों से ब्यूरोक्रेसी की त्वरित गति से निर्णय लेने की क्षमता पर नकारात्मक असर (Negative impact) पड़ रहा है. प्रदेश की गहलोत सरकार जनप्रतिनिधियों की डिजायर पर गत दो साल में अधिकारियों के कई बार तबादले कर चुकी है. इससे कोई अधिकारी औसत समय तक भी एक जगह नहीं टिक पा रहा है. वहीं इसके साथ ही अधिकारी अब इस बात को लेकर भी आशंकित हैं कि क्या वे नई जगह मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप काम कर पायेंगे या नहीं. अगर मंशा के अनुरूप कार्य नहीं हुआ तो वे फिर बदल दिये जायेंगे.

सरकार कार्यकर्ताओं की डिजायर और शिकायत पर ब्यूरोक्रेसी को लगातार ताश के पत्तों की फेंटती जा रही है. सरकार के निकाय और पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर किये गये ये तबादले ब्यूरोक्रेसी को ये रास नहीं आ रहे हैं. इससे अफसरों की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है. अभी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव सिर पर हैं. अधिकरियों को नई जगह जमने और जनप्रतिनिधियों की मंशा के अनुसार काम करने में समय लगेगा. जबकि राज्य निर्वाचन आयोग ने 90 निकायों का चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है. इससे प्रदेश के 20 जिलों में तत्काल रूप से आचार संहिता प्रभावी हो गई है.

बेहतर काम करने का समय नहीं मिल पा रहा है
वैसे तो राज्य में सत्ता बदलने के साथ ही ब्यूरोक्रेसी के तबादलों की पुरानी रवायत रही है. लेकिन गहलोत सरकार ने अपने 2 वर्ष के शासनकाल के दौरान बड़े पैमाने पर ग्राम स्तर से लेकर सचिवालय तक के अफसर कई बार बदल दिए हैं. अफसरों के सामने दुविधा की स्थिति यह हो रही है कि नए विभाग में जाने के कुछ महीने बाद ही उनका फिर तबादला कर दिया जाता है. ऐसे में सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं से जुड़े कार्य प्रभावित होते हैं. कई आईएएस अफसरों ने दबी जुबान में बताया कि वे बार-बार तबादलों से परेशान हो चुके हैं. क्योंकि इससे उन्हें बेहतर काम करने का समय नहीं मिल पा रहा है. जबकि सरकार जब चाहे मंत्रियों और विधायकों की डिजायर के आधार पर तबादले कर देती है. इससे वे मानिसक रूप से भी डिस्टर्ब हो रहे हैं.

हाल ही में 469 अधिकारियों के तबादले किये गये हैं
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 4 जनवरी की रात को और 5 जनवरी को दोपहर तक धड़ाधड़ आधा दर्जन तबादला सूचियां जारी कर एक बार फिर पूरी ब्यूरोक्रेसी को ताश के पत्तों की तरह फेंट दिया है. सरकार ने इन सूचियों में 469 आईपीएस ,आईएएस, आरएएस और आरपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिये थे. उसके तत्काल बाद राज्य में निकाय चुनाव की घोषणा के कारण आदर्श आचार संहिता लागू हो गई.

Tags: Ashok Gahlot, Bureaucracy in India, IAS, IPS, Transfer

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