Bureaucrats Vs Minister Controversy: हर बार ब्यूरोक्रेट्स पर भारी पड़े 'मंत्री महोदय', 8 IAS को हटना पड़ा

मंत्रियों से हुये विवादों के बाद हमेशा गाज ब्यूरोक्रेट्स पर ही गिरती रही है. इसके एक नहीं कई उदाहरण हैं.
मंत्रियों से हुये विवादों के बाद हमेशा गाज ब्यूरोक्रेट्स पर ही गिरती रही है. इसके एक नहीं कई उदाहरण हैं.

Bureaucrats Vs Minister Controversy: गहलोत सरकार के मंत्रियों का वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स के साथ टकराव कोई नई बात नहीं है. लेकिन इन विवादों (Disputes) में हमेशा आईएएस अधिकारियों को ही निपटाया (Removed) गया है.

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जयपुर. प्रदेश में एक बार फिर मंत्री और ब्यूरोक्रेट्स आमने-सामने हो गये हैं. इस बार विवाद गहलोत सरकार के कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल और अजमेर की संभागीय आयुक्त आरुषि मलिक के बीच अधिकारों को लेकर हुआ है. इस पर मंत्री ने संभागीय आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मंत्रियों से भिड़ने वाले ब्यूरोक्रेट्स पर अक्सर तबादले की गाज गिरती रही है. विवादों में रहने वाले अफसरों का तबादला कर दिया जाता है. नये घटनाक्रम में भी इससे इनकार नहीं किया जा रहा है. क्योंकि गहलोत सरकार का अब तक का इतिहास यही रहा है.

इन मंत्रियों और ब्यूरोक्रेट्स में हो चुकी है भिड़ंत

IAS श्रेया गुहा Vs पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह- पूर्व पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह लगातार ब्यूरोक्रेट्स को अपने निशाने पर लेते रहे हैं. भरतपुर से लेकर जयपुर में पर्यटन विभाग तक के अफसरों से विवाद के कारण वे हमेशा सुर्खियों में बने रहे हैं. उनका आरटीडीसी में टेंडर को लेकर ब्यूरोक्रेट्स को लेकर विवाद काफी सुर्खियों में रहा था. उन्होंने पूर्व एमडी एच गुइटे की विदेश यात्रा तक निरस्त करवा दी थी. उसके बाद गुइटे को आरटीडीसी से हटवा दिया. वहीं पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा और तत्कालीन पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के बीच भी विवाद हो चुका है. मंत्री की ओर से लगाए आरोपों के बाद राज्य सरकार ने गुहा को पर्यटन से हटाकर वन एवं पर्यावरण विभाग में भेज दिया था.



IAS नरेशपाल गंगवार Vs मंत्री उदयलाल आंजना- प्रमुख सचिव सहकारिता रहते हुए आईएएस नरेशपाल गंगवार और मंत्री उदयलाल आंजना के बीच कंट्रोवर्सी हुई. उसके बाद गत जुलाई में गंगवार को सहकारिता से हटाकर उद्योग विभाग में लगा दिया गया.

IAS राजेश यादव Vs परिवहन मंत्री प्रताप सिंह- परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव एवं आयुक्त राजेश यादव और मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बीच काफी समय तक अनबन रही. इसके चलते सरकार ने राजेश यादव को परिवहन से हटाकर जलदाय विभाग में लगा दिया.

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IAS मुग्धा सिन्हा Vs पूर्व मंत्री रमेश मीणा- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की पूर्व सचिव मुग्धा सिन्हा और तत्कालीन मंत्री रमेश मीणा के बीच भी पटरी नहीं बैठी. इसके बाद मुग्धा को सिन्हा को वहां से हटा दिया गया.

IAS समित शर्मा Vs मंत्री रघु शर्मा- एनएचएम के तत्कालीन निदेशक समित शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के बीच नियुक्तियों को लेकर विवाद हुआ. उसके बाद समित शर्मा को वहां से हटाया गया.

IAS मंजू राजपाल Vs मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा- मंजू राजपाल के शिक्षा विभाग में रहते हुए उनकी शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से लंबे समय तक कागज खरीद को लेकर अनबन चलती रही थी. इसको देखते हुए राज्य सरकार ने मंजू राजपाल को वहां से हटा दिया.

IAS दिनेश कुमार Vs मंत्री प्रमोद जैन भाया- माइंस के मामलों को लेकर खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव दिनेश कुमार और मंत्री प्रमोद जैन भाया के बीच विवाद भी काफी चर्चित रहा. इसके चलते महज छह माह में ही दिनेश कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया.

IAS राजेश्वर सिंह Vs IAS आरुषि मलिक- पंचायतीराज विभाग के तत्कालीन एसीएस राजेश्वर सिंह और 2005 बैच की आईएएस एवं विशेष सचिव आरुषी मलिक के बीच कई मामलों को लेकर विवाद हुआ. उसके बाद राज्य सरकार ने दो बार में दोनों ही अफसरों को हटा दिया.

विवादों के चलते ये अफसर भी हटाए गए
सीकर के तत्कालीन कलेक्टर यज्ञमित्र सिंह देव, आरटीडीसी के तत्कालीन एमडी डा. कुंजबिहारी पांड्या, चूरू के तत्कालीन कलेक्टर संदेश नायक, बाड़मेर के तत्कालीन कलेक्टर हिमांशु गुप्ता और अंशदीप तथा कोटा के तत्कालीन कलेक्टर ओमप्रकाश को हटा दिया गया था.
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