Rajasthan: BJP का मास्टर स्ट्रोक, क्या है पीतलिया की नाम वापसी का सीक्रेट गेम? पढ़ें इनसाइड स्टोरी 

 सहाड़ा विधानसभा उप चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है.

सहाड़ा विधानसभा उप चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है.

Rajasthan Assembly By Election: सहाड़ा सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से लादू लाल पितलिया (Ladulal Pitliya) बागी हो गए थे. बीजेपी को 30 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था.

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जयपुर. सहाड़ा विधानसभा उप चुनाव (Sahada Assembly By Election) में बीजेपी (BJP) को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. बागी लादू लाल पितलिया (Ladulal Pitliya) ने नाटकीय अंदाज में नाम वापस ले लिया. पीतलिया की बगावत से बीजेपी इतनी परेशान थी कि भीलवाड़ा से बेंगलुरु तक पीतलिया को मनाने को लिए ताकत झौंक दी. पीतलिया के मैदान से हटते ही बीजेपी फिर कांटे के मुकाबले में आ गई है. इस सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में भी पीतलिया टिकट के दावेदार थे. तब टिकट नहीं मिला तो वे बागी हो गए थे और 30 हजार वोट मिले थे जिससे बीजेपी चुनाव हार गई थी.

विधानसभा उप चुनाव से पहले बीजेपी ने पीतलिया को पार्टी में शामिल करने के लिए मनाया था. प्रदेश मंत्री और सहाड़ा के पार्टी के प्रभारी श्रवण सिंह बगड़ी ने तब पीतलिया को बीजेपी में शामिल होने में भूमिका निभाई थी. पीतलिया को टिकट नहीं मिली तो इस बार भी बागी हो गए. फिर श्रवण सिंह ही पार्टी के संकटमोचक बने. पीतलिया का कारोबार भी है. प्रभाव का इस्तेमाल कर पीतलिया के परिवार को तैयार किया नाम वापसी के लिए. लेकिन तीन बार ये कोशिश कांग्रेस को भनक लगने के बाद नाकामयाब हो गई थी.

ऐसे पलटा सियासी पाला

आखिरकार शुक्रवार सुबह छह बजे श्रवण सिंह बगड़ी पीतलिया को लेकर प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के सामने पहुंचे. फिर बेहद गोपनीय तरीके से चुनाव अधिकारी के दफ्तर तक ले जाकर बिना किसी को खबर लगे नाम वापस करवा दिया. परिवार पर जितना दबाब बीजेपी का था उससे कही अधिक सत्ताधारी पार्टी का भी था. पीतलिया का मैदान में रहना कांग्रेस प्रत्याशी की जीत की गांरटी माना जा रहा था.
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अब त्रिकोणीय मुकाबला है. बीजेपी के रतनलाल जाट, कांग्रेस की गायत्री देवी और आरएलपी के बद्रीलाल जाट चुनावी मैदान में हैं. बद्रीलाल जाट 2018 में बीजेपी के प्रत्याशी रहे रुपलाल जाट के भाई हैं, लेकिन  बीजेपी को यकीन है कि बद्रीलाल जाट से इतना खतरा नहीं जितना पीतलिया से था. पीतलिया खुद जैन समुदाय से हैं लेकिन एससी-एसटी समुदाय में इनका खासा प्रभाव माना जाता है.
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